img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : हिमालयी क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों का समाधान अब उत्तराखंड अकेले नहीं, बल्कि सभी पड़ोसी हिमालयी राज्यों के साथ मिलकर करेगा। प्रदेश सरकार ने इसके लिए 'हिमालयी राज्यों से समन्वयन और नीति निर्धारण परिषद' के स्वरूप में आंशिक संशोधन कर इसे और अधिक प्रभावी बना दिया है। नियोजन प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह परिषद एआई (AI) और डिजिटल नवाचार के जरिए हिमालय के संरक्षण और विकास का नया खाका खींचेगी।

क्यों पड़ी इस परिषद की जरूरत?

हिमालयी राज्यों (जैसे उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, अरुणाचल आदि) की समस्याएं और चुनौतियां लगभग एक जैसी हैं। बादल फटना, भूस्खलन, पलायन और पारिस्थितिकी संतुलन जैसे मुद्दों पर एक साझा नीति की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। अब साझेदारी के भाव से साझी चुनौतियों का मुकाबला करना आसान होगा।

विकास के '5 सूत्र' और डिजिटल वेधशाला

परिषद ने विकास और संरक्षण के लिए पांच प्रमुख स्तंभ तय किए हैं, जिनमें आधुनिक तकनीक का समावेश है:

हिमालयी डिजिटल वेधशाला: वास्तविक समय (Real-time) योजना और निगरानी के लिए एआई (AI) और जीआईएस (GIS) का उपयोग किया जाएगा।

डिजिटल हिमालयी एटलस: पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संकेतकों का मानचित्रण कर एक विस्तृत डिजिटल एटलस तैयार होगा।

स्मार्ट निर्णय प्लेटफॉर्म: जलवायु अवसंरचना और आपदा जोखिम के लिए एकीकृत विश्लेषण प्रणाली विकसित की जाएगी।

ग्रीन जॉब्स और स्टार्टअप: कृषि, हस्तकला, पर्यटन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 'हरित रोजगार' और स्थानीय उद्यमों (Startups) को बढ़ावा दिया जाएगा।

ई-लर्निंग और टेलीमेडिसिन: दुर्गम क्षेत्रों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाया जाएगा।

सीएम की अध्यक्षता में 'शासी निकाय' का गठन

परिषद के संचालन के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है:

अध्यक्ष: मुख्यमंत्री (शासी निकाय के अध्यक्ष)।

नामित सदस्य: विधायक किशोर उपाध्याय, पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, डॉ. जीएस रावत, पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी, गोविंद सिंह और सुशांत राज।

संयोजक: यूकास्ट (UCOST) के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत।

कार्यकारी निकाय: मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कार्यकारी निकाय दैनिक कार्यों का संपादन करेगा।

नीति आयोग से सहयोग की उम्मीद

उत्तराखंड सरकार को उम्मीद है कि इस पहल को नीति आयोग और केंद्र सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा। इससे केंद्रीय मंत्रालयों और विभिन्न हिमालयी राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा। परिषद के तहत सिविक साइंस आधारित जलस्रोत निगरानी और महिलाओं के नेतृत्व में सहकारिता (Cooperatives) के माध्यम से रोजगार सृजन पर विशेष बल दिया गया है।