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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड के पौड़ी‑गढ़वाल सहित आसपास के पर्वतीय इलाकों में हर सर्दी में हजारों प्रवासी पक्षियों के आने की परंपरा रही है। लेकिन इस बार, जनवरी के दूसरे पखवाड़े तक आने‑वाले कई सामान्य प्रवासी परिंदों को नजर नहीं आया है, जिससे बर्ड‑लवर्स और पर्यावरणविद हैरान हैं। मुख्य वजह ऊँचे पहाड़ों में इस सर्दी बर्फबारी का न होना माना जा रहा है, जिसने पक्षियों के माइग्रेशन (प्रवास) चक्र को प्रभावित किया है। 

आम तौर पर सर्दियों में यूरोप, साइबेरिया और मध्य एशिया जैसे ठंडे इलाकों से पक्षी भारत के हिमालयी व निचले मैदानों की ओर आते हैं ताकि यहाँ का मौसम अपेक्षाकृत नरम हो और उन्हें खाना‑ पानी और रहने के अनुकूल हालात मिलें। बर्फबारी और सर्दी के पैटर्न में बदलाव से इन परिंदों के रहने‑जाने के मौसम में बदलाव आया है और कई बार उनका आना देरी से होता है या रद्द हो जाता है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2026 के सर्दी सीज़न में बर्फबारी का अभाव हिमालय के पारिस्थितिक चक्रों को प्रभावित कर रहा है, जिस वजह से न केवल औषधीय पौधों और ऊँचे हिमालय के पारिस्थितिकी पर असर दिखा है, बल्कि पक्षियों के प्रवास की आदत भी बदल रही है। 

इस बदलाव का असर स्थानीय पर्यटन और इन क्षेत्रों के जैविक चक्र पर भी पड़ सकता है। पारंपरिक रूप से बर्ड‑वॉचिंग पर्यटक और वैज्ञानिक आगंतुक इन मौसमों में पक्षियों की उपस्थिति का आनंद लेते हैं और उनका अध्ययन करते हैं, लेकिन इस बार यह अनुभव विलक्षण रहा है।