Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखीमपुर खीरी में एक ऐतिहासिक अन्याय का अंत करते हुए सात दशकों से विस्थापित जीवन जी रहे 331 बांग्लादेशी हिंदू परिवारों और थारू जनजाति के लोगों को जमीन के मालिकाना हक का प्रमाण पत्र सौंपा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनपद को 1300 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं की सौगात भी दी।
70 साल का लंबा इंतजार हुआ खत्म
1970 के दशक में विस्थापित होकर आए इन परिवारों के पास अब तक अपनी जमीन का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। मुख्यमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल पट्टे बांटने का आयोजन नहीं है, बल्कि यह 'अधिकार से आत्मनिर्भरता' और 'आत्मसम्मान' की एक ऐतिहासिक यात्रा है।
'प्रजा के सुख में ही राजा का सुख': शास्त्र का दिया हवाला
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भारतीय परंपरा और शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा:
"प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानाञ्च हिते हितम्"
अर्थात, सच्चा शासन वही है जहां प्रजा सुखी रहे। शासन का कल्याण उसकी व्यक्तिगत अभिलाषा पूरी होने में नहीं, बल्कि जनता जनार्दन के कल्याण में निहित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब जनता खुश होती है, वही शासन की असली खुशी का आधार होता है।
दबंगों और अवैध वसूली से मिलेगी मुक्ति
मुख्यमंत्री ने मालिकाना हक मिलने के फायदों को गिनाते हुए जनता को सुरक्षा का भरोसा दिलाया:
कानूनी सुरक्षा: अब कोई भी दबंग आपकी जमीन पर कब्जा नहीं कर पाएगा।
भ्रष्टाचार पर लगाम: कोई लेखपाल आपके खेत का गलत लेखा-जोखा प्रस्तुत कर किसी और को लाभ नहीं पहुंचा सकेगा।
पुलिस हस्तक्षेप का अंत: आपके अपने अधिकारों के बीच अब पुलिस बेवजह हस्तक्षेप नहीं करेगी और अवैध वसूली के रास्ते बंद होंगे।
आत्मनिर्भरता की गारंटी: जमीन का हक मिलने से अब ये परिवार सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ उठा सकेंगे और आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
विधायकों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को सराहा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं यहाँ के स्थानीय विधायकों के साथ आए हैं क्योंकि यह अधिकार उन्हें जनता ने ही दिया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार बिना किसी भेदभाव के समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं को पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
लखीमपुर खीरी में 1300 करोड़ की योजनाओं के शिलान्यास और विस्थापितों को मिले हक से पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल है।




