Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमतौर पर सख्त फैसलों और कड़े प्रशासन के लिए जाना जाता है, लेकिन जब बात बच्चों की आती है तो वही मुख्यमंत्री पूरी तरह अलग रूप में नजर आते हैं। नर्सरी में दाखिले की जिद लेकर पहुंची मासूम बच्ची हो या चॉकलेट मांगते नन्हे बच्चे—सीएम योगी के सामने बच्चों की मासूमियत बेझिझक सामने आती है और मुख्यमंत्री भी उतनी ही सहजता से उनसे संवाद करते हैं।
सैल्यूट से शुरू हुई मासूम बातचीत
हाल ही में एक छोटी बच्ची ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देखते ही सैल्यूट किया। इस दृश्य ने वहां मौजूद सभी का दिल जीत लिया। मुख्यमंत्री ने भी मुस्कुराते हुए बच्ची को पढ़ाई पर ध्यान देने और आगे बढ़ने की सीख दी। बच्चों के प्रति यह अपनापन सीएम योगी के कोमल हृदय और सर्वसुलभ स्वभाव को दर्शाता है।
जनता दर्शन में बच्चों से भावनात्मक संवाद
सोमवार को ‘जनता दर्शन’ के दौरान मां के साथ पहुंची नन्ही अनाबी अली से मुख्यमंत्री का संवाद इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। स्कूल एडमिशन की जिद के साथ जब अनाबी ने एबीसीडी और कविता सुनाई, तो मुख्यमंत्री भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके। इससे पहले मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में एक बच्चे से “और क्या चाहिए” पूछना और उसके मासूम जवाब पर ठहाका लगाना भी सीएम के बालप्रेम की झलक देता है।
समस्याओं का त्वरित और संवेदनशील समाधान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ न केवल बच्चों से आत्मीय संवाद करते हैं, बल्कि उनसे जुड़ी समस्याओं का समाधान भी बिना देरी के कराते हैं। बीते दिनों ‘जनता दर्शन’ में दो साल की अनन्या से बातचीत ने लोगों को भावुक कर दिया। वहीं 31 दिसंबर को एक मेजर की बेटी अंजना भट्ट की मकान कब्जे की शिकायत पर सीएम ने 24 घंटे के भीतर मकान कब्जा मुक्त कराते हुए आरोपियों पर एफआईआर और गिरफ्तारी के निर्देश दिए।
खुशी गुप्ता की कहानी बनी मिसाल
कानपुर की मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता की जिद और हिम्मत की कहानी भी प्रदेशभर में चर्चा में है। अकेले पैदल लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री से मिलने की उसकी इच्छा जब सीएम योगी तक पहुंची, तो उन्होंने न केवल उसे बुलाया, बल्कि उसके बनाए चित्र स्वीकार कर उसके सुरक्षित और शिक्षित भविष्य का भरोसा भी दिलाया। यह घटना मुख्यमंत्री की ‘प्रदेश ही परिवार’ सोच को मजबूती से सामने लाती है।
स्कूल एडमिशन से फीस माफी तक
‘जनता दर्शन’ के माध्यम से लखनऊ की अनाबी अली, कानपुर की मायरा, गोरखपुर की पंखुड़ी और मुरादाबाद की वाची का स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित कराया गया। मायरा ने डॉक्टर बनने का सपना बताया तो मुख्यमंत्री ने तत्काल एडमिशन के निर्देश दिए। पंखुड़ी की फीस माफ कराकर उसे दोबारा स्कूल भेजा गया, जबकि वाची की पढ़ने की इच्छा को भी सीएम ने तुरंत पूरा कराया।
गणतंत्र दिवस परेड में बच्चों का स्नेह
26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड के दौरान बच्चे खुद चलकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंच गए। बच्चों के साथ फोटो, बातचीत और एक नन्ही बच्ची को गोद में उठाकर मुख्यमंत्री ने अपना वात्सल्य भाव प्रकट किया, जिसने माहौल को भावुक कर दिया।
बीमार बेटे के इलाज का तुरंत इंतजाम
बीते सितंबर में ‘जनता दर्शन’ के दौरान एक वृद्ध मां अपने कैंसर पीड़ित बेटे की पीड़ा लेकर सीएम के पास पहुंची। मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए बेटे को तुरंत एंबुलेंस से कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भिजवाया और इलाज शुरू कराया।
इन तमाम घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त प्रशासक वाला चेहरा बच्चों, महिलाओं और जरूरतमंदों के सामने पूरी तरह संवेदनशील और करुणामय बन जाता है।




