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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अब परिषदीय विद्यालयों (प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल) का कायाकल्प करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब प्रदेश के सरकारी स्कूलों के बच्चे भी कॉन्वेंट और निजी स्कूलों की तर्ज पर 'वार्षिकोत्सव' (Annual Function) का आनंद लेंगे। सरकार का उद्देश्य सरकारी स्कूलों के बच्चों के मन से हीन भावना को खत्म करना और उन्हें कॉन्वेंट जैसी आधुनिक सुविधाएं व प्रोत्साहन देना है। इस भव्य पहल के लिए शासन ने 5 करोड़ 7 लाख रुपये की भारी-भरकम धनराशि स्वीकृत की है।

कॉन्वेंट की तर्ज पर 'एनुअल प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन'

अक्सर देखा जाता है कि महंगे निजी स्कूलों में बच्चों को छोटी-छोटी उपलब्धियों पर ट्रॉफी और सर्टिफिकेट देकर प्रोत्साहित किया जाता है। अब यही संस्कृति यूपी के उन सरकारी स्कूलों में दिखेगी जहां 232 से अधिक नामांकन हैं। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने सभी जिलों को इस संबंध में सख्त गाइडलाइंस जारी कर दी हैं।

पुरस्कार में क्या-क्या मिलेगा?

बच्चों को उनकी मेहनत और प्रतिभा के लिए केवल शाबाशी नहीं, बल्कि भौतिक उपहार भी दिए जाएंगे:

सम्मान के प्रतीक: भव्य ट्रॉफी, शील्ड और प्रशस्ति पत्र (सर्टिफिकेट)।

उपयोगी सामग्री: स्कूल बैग, पानी की बोतल और बेहतरीन स्टेशनरी (रंग, ड्राइंग नोटबुक, पेंसिल सेट)।

बौद्धिक उपहार: ज्ञानवर्धक और प्रेरक पुस्तकें।

सिर्फ टॉपर ही नहीं, 'स्टार छात्र' भी होंगे सम्मानित

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि पुरस्कार केवल कक्षा में प्रथम आने वाले मेधावियों तक सीमित नहीं रहेंगे। योगी सरकार ने सम्मान का दायरा बढ़ाते हुए इन श्रेणियों को भी शामिल किया है:

100% उपस्थिति: जो बच्चे नियमित स्कूल आते हैं, उन्हें 'स्टार छात्र' के रूप में पहचान मिलेगी।

सांस्कृतिक व खेलकूद: गायन, नृत्य, कला और खेल प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मंच मिलेगा।

सकारात्मक व्यवहार: अनुशासन और नेतृत्व क्षमता दिखाने वाले छात्रों को भी सराहा जाएगा।

अभिभावकों का मान: मजबूत होगी पेरेंट-टीचर सहभागिता

प्राइवेट स्कूलों की तरह अब सरकारी स्कूलों में भी पेरेंट-टीचर मीटिंग (PTM) और सामुदायिक जुड़ाव पर जोर दिया जाएगा। समारोह के दौरान जागरूक अभिभावकों को भी मंच पर बुलाकर सम्मानित किया जाएगा।

सम्मान का तरीका: बच्चों को नियमित स्कूल भेजने वाले माता-पिता को 'शॉल', 'स्मृति चिन्ह' या 'पौधा' देकर सम्मानित किया जाएगा।

SMC का योगदान: विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के सक्रिय सदस्यों को भी पहचान मिलेगी, जिससे स्कूल और समाज के बीच की दूरी कम होगी।

हीन भावना का अंत और आत्मविश्वास का उदय

महानिदेशक (स्कूल शिक्षा) मोनिका रानी के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों के भीतर छिपी हीन भावना को जड़ से खत्म करना है। जब एक साधारण पृष्ठभूमि का बच्चा मंच पर अपनी ट्रॉफी उठाएगा और उसके माता-पिता को सम्मानित किया जाएगा, तो उसका आत्मविश्वास नई ऊंचाइयों को छुएगा।