Prabhat Vaibhav, Digital Desk : पंजाब की सियासत में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की सुरक्षा (Security) हटाए जाने का मुद्दा अब गरमाता जा रहा है। पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने इस फैसले को लेकर 'आप' सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि अगर वास्तव में राघव चड्ढा को कोई खतरा नहीं था, तो अब तक उन्हें इतनी भारी-भरकम सुरक्षा क्यों दी गई थी?
सुरक्षा को राजनीतिक हथियार न बनाए सरकार: रंधावा
सुखजिंदर रंधावा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय को कभी भी राजनीतिक प्रतिशोध या आंतरिक समीकरणों का हथियार नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, "जनता की सुरक्षा और टैक्स का पैसा किसी राजनीतिक स्टंट के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। इस मामले में पारदर्शिता की भारी कमी दिख रही है।"
डीजीपी पंजाब से माँगा स्पष्टीकरण
पूर्व गृह मंत्री रहे रंधावा ने डीजीपी पंजाब से इस फैसले के पीछे के तकनीकी कारणों को स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने कुछ प्रमुख बिंदु उठाए:
थ्रेट परसेप्शन (खतरे का आकलन): क्या सुरक्षा हटाना खुफिया इनपुट पर आधारित है या यह पार्टी के भीतर चल रही खींचतान का नतीजा है?
बदलाव का आधार: यदि पहले सुरक्षा दी गई थी, तो अब ऐसा क्या बदल गया कि उसे अचानक वापस ले लिया गया?
'मेरे समय में केवल खुफिया इनपुट ही था आधार'
अपने कार्यकाल का हवाला देते हुए रंधावा ने कहा कि जब वे गृह मंत्री थे, तब सुरक्षा देने या हटाने का निर्णय पूरी तरह से सीआईडी (CID) और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट्स के आधार पर होता था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार संस्थागत प्रक्रियाओं का पालन करने के बजाय अपनी सुविधा के अनुसार फैसले ले रही है, जो राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है।
जनता के पैसे का दुरुपयोग?
रंधावा ने तंज कसते हुए कहा कि अगर सुरक्षा बिना किसी वास्तविक खतरे के दी गई थी, तो यह जनता के धन की बर्बादी थी। और यदि खतरा होने के बावजूद सुरक्षा हटाई गई है, तो यह सांसद की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की कि सुरक्षा प्रबंधन की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा बना रहे।




