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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : उत्तराखंड में डिजिटल जनगणना 2027 के पहले चरण का औपचारिक आगाज़ आज से हो गया है। प्रदेशभर में भवनों की गणना (House Listing) का काम शुरू कर दिया गया है, जो 24 मई तक चलेगा। इस महाभियान को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार ने 27 हजार कर्मचारियों की फौज मैदान में उतारी है। जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि यह राष्ट्रीय महत्व का कार्य है और इसमें किसी भी प्रकार की बाधा या गलत सूचना दंडनीय अपराध माना जाएगा।

'हर द्वार, दस्तक' अभियान की मुख्य बातें:

33 सवालों की लिस्ट: जनगणना कर्मचारी (प्रगणक) आपके घर पहुंचकर कुल 33 प्रश्न पूछेंगे। इसमें मुख्य रूप से आपके भवन की स्थिति, घर में मौजूद सुविधाओं और परिसंपत्तियों (Assets) से संबंधित डेटा जुटाया जाएगा।

पूरी तरह डिजिटल: यह पहली बार है जब जनगणना का कार्य पूरी तरह डिजिटल मानचित्रों और उपकरणों के माध्यम से किया जा रहा है। इसके लिए पूरे राज्य को 29,567 ब्लॉक्स में बांटा गया है।

भवन नंबर जरूरी: यदि कोई व्यक्ति अपने मकान पर नंबर डालने से रोकता है या जनगणना कर्मचारी को कार्य करने से मना करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

सावधान! गलत जानकारी पड़ सकती है भारी

जनगणना निदेशक ने चेतावनी दी है कि जनगणना अधिनियम के तहत गलत सूचना देना या प्रगणक को रोकना सीधे मुकदमे का आधार बनेगा।

मुकदमा और दंड: राष्ट्रीय कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ जनगणना अधिनियम की धाराओं के तहत कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

गोपनीयता का भरोसा: हालांकि प्रशासन ने यह भी भरोसा दिलाया है कि आपके द्वारा दी गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रखी जाएगी, जिसका उपयोग केवल भविष्य की योजनाओं और विकास कार्यों के लिए होगा।

27 हजार कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण

इस डिजिटल अभियान के लिए नियुक्त किए गए 27 हजार कर्मचारियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे मोबाइल ऐप और डिजिटल मानचित्रों का कुशलतापूर्वक उपयोग कर सकें। सरकार की अपील है कि नागरिक इस अभियान में पूरा सहयोग करें और सही जानकारी देकर प्रदेश के बेहतर भविष्य के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।