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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और वर्क प्रेशर के बीच खुद को 'रिलैक्स' करने के लिए लोग अक्सर शराब का सहारा लेते हैं। शुरुआत एक पेग से होती है, जिसे लोग थकान मिटाने का जरिया मानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह शौक कब आपको मानसिक बीमारियों की गहरी खाई में धकेल देता है, इसका पता भी नहीं चलता। हालिया शोध और विशेषज्ञों की मानें तो शराब का सेवन चिंता (Anxiety) और अवसाद (Depression) का सबसे बड़ा कारण बन रहा है।

मस्तिष्क के 'हैप्पी हार्मोन्स' पर सीधा प्रहार

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो शराब मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर के संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ देती है। ये वही हार्मोन हैं जो हमें खुश और शांत महसूस कराते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो व्यक्ति को बेवजह बेचैनी, घबराहट और उदासी घेरने लगती है। शुरुआत में जो शराब सुकून देती नजर आती है, वही बाद में अनिद्रा (Insomnia) और गंभीर मानसिक तनाव का कारण बन जाती है।

नींद की कमी और बढ़ता तनाव: एक खतरनाक चक्र

शराब पीने के बाद अक्सर लोगों को लगता है कि उन्हें गहरी नींद आएगी, लेकिन हकीकत इसके उलट है। शराब नींद की गुणवत्ता को खराब कर देती है, जिससे अगले दिन व्यक्ति चिड़चिड़ापन और भारीपन महसूस करता है। इस मानसिक स्थिति से उबरने के लिए वह फिर से शराब का सहारा लेता है, और देखते ही देखते यह एक 'विशियस साइकिल' यानी कभी न खत्म होने वाला चक्र बन जाता है।

कैसे जीतें शराब की लत से जंग? अपनाएं ये अचूक तरीके

अगर आप या आपका कोई अपना इस लत की गिरफ्त में है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। दृढ़ इच्छाशक्ति और सही दिशा में उठाए गए कदम आपको एक नई जिंदगी दे सकते हैं:

धीरे-धीरे कम करें सेवन: शराब को एकदम से छोड़ने के बजाय उसकी मात्रा को धीरे-धीरे घटाएं।

योग और व्यायाम का सहारा: नियमित रूप से एक्सरसाइज और योग करने से शरीर में एंडोर्फिन रिलीज होता है, जो प्राकृतिक रूप से मूड को बेहतर बनाता है।

पूरी नींद लें: मानसिक स्वास्थ्य को दोबारा पटरी पर लाने के लिए 7 से 8 घंटे की गहरी नींद अनिवार्य है।

अपनों से बात करें: मन की उलझनों को छिपाने के बजाय परिवार और दोस्तों से साझा करें। भावनात्मक सहयोग (Emotional Support) रिकवरी की गति को तेज कर देता है।

विशेषज्ञ की सलाह है जरूरी

यदि लाख कोशिशों के बाद भी आप इस लत को नहीं छोड़ पा रहे हैं, तो किसी प्रोफेशनल काउंसलर या डॉक्टर की मदद लेने में संकोच न करें। मेडिकल ट्रीटमेंट और थेरेपी के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है। याद रखें, आपकी जिंदगी शराब की बोतल से कहीं ज्यादा कीमती है।