img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : देवभूमि उत्तराखंड में आम आदमी की जेब पर महंगाई का दोहरा वार हुआ है। प्रदेश में रसोई गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने न केवल घरों का बजट बिगाड़ा है, बल्कि चाय की चुस्की को भी महंगा कर दिया है। गैस सिलेंडरों की किल्लत और आसमान छूते दामों के कारण अब छोटे होटल और चाय की दुकान चलाने वाले दुकानदार पारंपरिक ईंधन की ओर लौटने को मजबूर हैं। देहरादून से लेकर हल्द्वानी तक, कई इलाकों में छोटे ढाबों और चाय के स्टालों पर अब फिर से लकड़ी और कोयले का धुआं नजर आने लगा है, जिससे खान-पान की चीजों के दाम भी बढ़ गए हैं।

रसोई गैस की किल्लत ने बढ़ाई मुसीबत

उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से कमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में आई बाधा ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। दुकानदारों का कहना है कि एक ओर गैस के दाम बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समय पर रिफिल न मिलने से कारोबार ठप होने की कगार पर है। इस संकट का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। जो चाय पहले 8 से 10 रुपये में मिलती थी, अब उसके लिए लोगों को 12 से 15 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। नाश्ते और भोजन की थाली की कीमतों में भी 10 से 20 फीसदी तक का इजाफा देखा जा रहा है।

पुराने दौर में लौटे दुकानदार: लकड़ी और कोयले का सहारा

गैस संकट से पार पाने के लिए छोटे दुकानदारों ने अब देसी जुगाड़ अपनाना शुरू कर दिया है। शहर के बाहरी इलाकों और कस्बों में दुकानदार अब मिट्टी के चूल्हों और अंगीठियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। दुकानदारों का तर्क है कि गैस सिलेंडर महंगा होने की वजह से वे पुराने दामों पर चाय-नाश्ता नहीं बेच पा रहे थे, इसलिए लागत कम करने के लिए लकड़ी और कोयले का रुख करना पड़ा है। हालांकि, इससे पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं, लेकिन मजबूरी के आगे दुकानदार बेबस नजर आ रहे हैं।

आम आदमी की जेब पर पड़ रहा सीधा बोझ

पर्यटन सीजन से ठीक पहले आई इस महंगाई ने स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों की चिंता भी बढ़ा दी है। कामकाजी लोग जो रोजाना बाहर चाय-नाश्ता करते हैं, उनके मासिक खर्च में काफी बढ़ोतरी हो गई है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई और कीमतें कम नहीं की गईं, तो आम आदमी की थाली से दाल-रोटी भी महंगी हो जाएगी। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए अब बाहर खाना एक लग्जरी बनता जा रहा है। फिलहाल, शासन-प्रशासन की ओर से इस संकट को सुलझाने के दावों के बीच जनता राहत का इंतजार कर रही है।