Prabhat Vaibhav, Digital Desk : मिडिल ईस्ट में गहराते अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच कूटनीतिक गलियारों से बड़ी खबर आ रही है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में पाकिस्तान को एक 'भरोसेमंद मध्यस्थ' के रूप में नहीं देखता। ईरानी सांसद इब्राहिम रेज़ाई के तीखे बयानों ने न केवल पाकिस्तान की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर इस्लामाबाद की कूटनीतिक साख को भी तगड़ा झटका दिया है।
"पाकिस्तान पड़ोसी अच्छा है, पर मध्यस्थ नहीं"
ईरानी सांसद इब्राहिम रेज़ाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए लिखा कि पाकिस्तान भले ही एक अच्छा पड़ोसी हो, लेकिन अमेरिका के साथ उसके दशकों पुराने और गहरे संबंध उसे एक निष्पक्ष मध्यस्थ बनने से रोकते हैं। रेज़ाई ने दो टूक शब्दों में कहा, "पाकिस्तान में मध्यस्थता के लिए आवश्यक विश्वास का अभाव है।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब शाहबाज सरकार वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही थी।
वाशिंगटन के प्रति पाकिस्तान की 'चुप्पी' पर भड़का ईरान
ईरान का आरोप है कि पाकिस्तान खुले तौर पर अमेरिका की गलतियों और वादाखिलाफी पर बोलने से बचता है। ईरानी नेतृत्व इस बात से नाराज है कि अमेरिका जब लेबनान में युद्धविराम के वादे से पीछे हटा, तो पाकिस्तान ने चुप्पी साधे रखी। इसके अलावा, ईरान की जब्त संपत्तियों को वापस करने के अमेरिकी वादे पर भी पाकिस्तान ने कोई दबाव नहीं बनाया। ईरान का मानना है कि एक सच्चा मध्यस्थ वही है जो दोनों पक्षों की कमियों को उजागर करे, न कि किसी एक शक्ति के प्रति पक्षपाती रहे।
वार्ता फेल और होटल का बिल भी नहीं चुका सका पाकिस्तान!
पाकिस्तान की कूटनीतिक विफलता के साथ-साथ उसकी आर्थिक बदहाली का भी एक शर्मनाक पहलू सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान खुद को एक विश्वसनीय मध्यस्थ साबित करने की कोशिश तो कर रहा था, लेकिन वह वार्ता के लिए चुने गए 'सेरेना होटल' का बिल तक चुकाने की स्थिति में नहीं था। अंततः होटल के मालिक 'आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क' को आगे आकर सारा खर्च वहन करना पड़ा। यह घटना पाकिस्तान के गंभीर आर्थिक संकट और उसके खोखले दावों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर करती है।
क्या अब पूरी तरह रुक जाएगी शांति वार्ता?
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के पाकिस्तान दौरे के बाद भी कोई ठोस नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है। ईरान द्वारा वार्ता के दूसरे दौर में शामिल होने से इनकार करने के बाद युद्ध समाप्ति के प्रयास ठप पड़ गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर उठे इन सवालों के बाद अब कतर या ओमान जैसे देशों को मध्यस्थता की कमान संभालनी पड़ सकती है, क्योंकि ईरान अब पाकिस्तान की मेज पर बैठने को तैयार नहीं है।




