img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने इजरायल और पश्चिमी देशों के उन कयासों पर विराम लगा दिया है, जिनमें प्रमुख नेताओं की मौत के बाद ईरानी व्यवस्था के कमजोर होने के दावे किए जा रहे थे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक बेहद सख्त और दो टूक बयान जारी करते हुए कहा है कि शीर्ष नेतृत्व के जाने से ईरान की सैन्य या रणनीतिक क्षमता पर रत्ती भर भी असर नहीं पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की शासन व्यवस्था व्यक्तियों पर नहीं, बल्कि एक मजबूत विचारधारा और संस्थागत ढांचे पर टिकी है, जिसकी ताकत आज भी पहले जैसी बरकरार है।

व्यवस्था में कोई दरार नहीं: अराघची का पलटवार

विदेशी मीडिया और इजरायली खुफिया एजेंसियों द्वारा फैलाए जा रहे दावों को खारिज करते हुए अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान का प्रतिरोध (Resistance) पहले से कहीं अधिक संगठित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि "शहादत हमारे लिए कमजोरी नहीं, बल्कि नई ऊर्जा का स्रोत है।" अराघची के इस बयान को सीधे तौर पर इजरायल के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, जो हाल के दिनों में ईरान समर्थित गुटों और उनके नेतृत्व को निशाना बनाने का दावा कर रहा है। ईरानी विदेश मंत्री ने साफ किया कि उनकी रक्षात्मक और आक्रामक नीतियां पूरी तरह अपरिवर्तित हैं।

इजरायल की रणनीतियों पर ईरान की पैनी नजर

ईरानी नेतृत्व का मानना है कि इजरायल मनोवैज्ञानिक युद्ध के जरिए ईरान के भीतर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, अराघची ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वस्त किया कि ईरान की आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव में कोई कमी नहीं आई है। उन्होंने कहा कि "हमारी व्यवस्था इतनी मजबूत है कि किसी भी बड़े नेता की कमी को तुरंत भरने और अपनी संप्रभुता की रक्षा करने में सक्षम है।" तेहरान से आया यह बयान उस समय महत्वपूर्ण है जब लाल सागर और लेबनान सीमा पर तनाव चरम पर है।

ताकत बरकरार: परमाणु और मिसाइल प्रोग्राम पर अडिग

ईरान ने एक बार फिर दोहराया है कि वह अपनी सैन्य क्षमताओं और मिसाइल कार्यक्रमों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। अराघची ने विदेशी राजनयिकों को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि अराघची का यह रुख दिखाता है कि ईरान अपनी 'फॉरवर्ड डिफेंस' की नीति पर कायम है और वह इजरायल को किसी भी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं है। इस बयान के बाद अब वैश्विक शक्तियों की निगाहें इजरायल की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।