Prabhat Vaibhav, Digital Desk : बिहार में बेरोजगारी के खिलाफ जंग में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) विभाग ने संजीवनी का काम किया है। केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के नेतृत्व में इस विभाग ने राज्य के आर्थिक ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में बिहार के भीतर एमएसएमई इकोसिस्टम ने ऐसी रफ्तार पकड़ी है कि 11 लाख से ज्यादा नए उद्यमों ने 77 लाख से अधिक लोगों के हाथों को काम दिया है। कोरोना काल के बाद बिहार की यह 'इंडस्ट्रियल छलांग' पूरे देश के लिए चर्चा का विषय बन गई है।
पटना बना बिहार का 'रोजगार हब', 7.5 लाख लोगों को मिला काम
राज्य की राजधानी पटना इस औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, बिहार में निबंधित कुल एमएसएमई में से करीब 10 प्रतिशत (1,25,984) अकेले पटना जिले में संचालित हो रहे हैं। इन उद्यमों के माध्यम से पटना में 7.5 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। लोकसभा में डॉ. मो. जावेद और अन्य सांसदों के सवालों के जवाब में एमएसएमई राज्य मंत्री शोभा करांदलाजे ने जो जानकारी साझा की, वह बिहार की बदलती तस्वीर की गवाही दे रही है।
व्यापार और विनिर्माण क्षेत्र में आई जबरदस्त तेजी
बिहार में एमएसएमई का दायरा केवल छोटे कामों तक सीमित नहीं है। राज्य में सबसे अधिक 6.14 लाख एमएसएमई व्यापार क्षेत्र में निबंधित हैं। इसके बाद विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र का नंबर आता है, जहां 2.70 लाख से ज्यादा इकाइयां काम कर रही हैं। सेवा क्षेत्र (Service Sector) में भी 2.49 लाख उद्यम सक्रिय हैं। दिलचस्प बात यह है कि गया, भागलपुर और समस्तीपुर जैसे जिलों में विनिर्माण क्षेत्र में सेवा क्षेत्र की तुलना में ज्यादा सक्रियता देखी जा रही है, जो बिहार के 'मेक इन बिहार' विजन को मजबूती दे रहा है।
मार्जिन मनी सब्सिडी ने भरी उद्योगों में जान
उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत मिलने वाली मदद में भी भारी इजाफा हुआ है। 2022-23 में जहां 4,459 सूक्ष्म उद्यमों को लगभग 121 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी मिली थी, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 150 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। बैंकों से आसान लोन और सरकारी सब्सिडी के तालमेल ने बिहार के युवाओं को 'जॉब सीकर' के बजाय 'जॉब क्रिएटर' बना दिया है।




