Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई उम्मीदवार पहले दर्ज एफआईआर का उल्लेख आवेदन में नहीं करता है, तो केवल इसी आधार पर उसकी नौकरी रद नहीं की जा सकती—खासकर तब, जब वह उस मामले में सम्मानपूर्वक बरी हो चुका हो।
न्यायमूर्ति जगमोहन बंसल ने इस संबंध में दायर दो याचिकाओं को स्वीकार करते हुए पंजाब पुलिस को निर्देश दिया कि संबंधित उम्मीदवारों को चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं। अदालत ने कहा कि अधिकारियों को हर मामले का यांत्रिक ढंग से नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण और संतुलित मूल्यांकन करना चाहिए।
अदालत ने टिप्पणी की कि विभागीय अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए कानूनी सिद्धांतों को नजरअंदाज करते हुए केवल एफआईआर के आधार पर उम्मीदवारी रद कर दी, जो न्यायसंगत नहीं है।
मामले में एक याचिकाकर्ता पूर्व सैनिक था, जिसने भारतीय सेना में 17 वर्षों तक सेवा देने के बाद पंजाब पुलिस में पूर्व सैनिक (अनुसूचित जाति) कोटे से भर्ती के लिए आवेदन किया था। उसने भर्ती प्रक्रिया के सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए थे, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान उसके खिलाफ पहले दर्ज एक आपराधिक मामले का हवाला देकर उसकी उम्मीदवारी रद कर दी गई।
यह मामला उसकी पत्नी द्वारा वैवाहिक विवाद के दौरान दर्ज कराया गया था, जिसमें आईपीसी की धारा 498A, 406, 506 और 34 शामिल थीं। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि यह मामला आवेदन से कई वर्ष पहले ही समाप्त हो चुका था और ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के आरोप सिद्ध न होने के आधार पर याचिकाकर्ता को बरी कर दिया था।
न्यायालय ने यह भी नोट किया कि शिकायतकर्ता के पिता ने अदालत में स्पष्ट बयान दिया था कि दहेज की कोई मांग नहीं की गई थी और विवाद पारिवारिक मतभेदों से जुड़ा हुआ था।
हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही उम्मीदवार ने आवेदन पत्र में एफआईआर का उल्लेख न किया हो, लेकिन जब वह पहले ही दोषमुक्त हो चुका है और आरोप गंभीर प्रकृति के नहीं थे, तो केवल सूचना छिपाने के आधार पर उसकी उम्मीदवारी रद करना अनुचित है।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के अवतार सिंह बनाम भारत संघ और पवन कुमार मामलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि एफआईआर से जुड़ी जानकारी छिपाने के हर मामले में स्वतः अयोग्यता लागू नहीं होती। नियोक्ता को तथ्यों और परिस्थितियों का संतुलित मूल्यांकन करना आवश्यक है।
इसके साथ ही न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब पुलिस नियम, 1934 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो समाप्त हो चुके आपराधिक मामले की जानकारी न देने पर आवेदन को स्वतः निरस्त करने का निर्देश देता हो। ऐसे में विभाग की कार्रवाई को अदालत ने अनुचित और यांत्रिक करार दिया।




