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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब के कपूरथला जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। सुल्तानपुर लोधी के गांव गिल्ला गाखला में आवारा कुत्तों के एक हिंसक झुंड ने 8 साल के मासूम बच्चे पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। मृतक बच्चे की पहचान सूरज के रूप में हुई है, जो अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। इस घटना के बाद पूरे इलाके में मातम और दहशत का माहौल है।

खेत में खेलते समय हुआ हमला: 5-6 कुत्तों ने बनाया शिकार

जानकारी के अनुसार, सूरज के पिता मनोज मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के रहने वाले हैं और वर्तमान में गिल्ला गाखला गांव में मजदूरी करते हैं। शुक्रवार को मनोज खेत में आलू की खोदाई कर रहे थे। दोपहर के समय उनकी पत्नी पूनम और बेटा सूरज उन्हें खाना देने खेत पर आए थे। इसी दौरान सूरज पास ही स्थित एक ट्यूबवेल के पास गया, जहाँ घात लगाकर बैठे 5-6 आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर अचानक हमला कर दिया।

मंजर देख कांप गई रूह: शरीर से गायब था मांस

सूरज के पिता मनोज ने बताया कि जब उन्होंने कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनी, तो उन्हें लगा कि कुत्ते आपस में लड़ रहे हैं। लेकिन जब वे पास पहुंचे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। कुत्तों का झुंड उनके मासूम बेटे को बुरी तरह नोच रहा था। मनोज ने कड़ी मशक्कत के बाद कुत्तों को भगाया, लेकिन तब तक मासूम सूरज लहूलुहान हो चुका था। कुत्तों ने उसके सिर और शरीर के अन्य अंगों से मांस तक नोच लिया था।

इलाज के दौरान तोड़ा दम: बुझ गया घर का इकलौता चिराग

गंभीर रूप से घायल सूरज को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उसकी नाजुक हालत को देखते हुए जालंधर के सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉक्टर नमिता घई के अनुसार, बच्चे के शरीर पर गहरे घाव थे और संक्रमण तेजी से फैल रहा था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद सूरज ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने बताया कि पूनम के दो गर्भपात होने के बाद बड़ी मन्नत से सूरज का जन्म हुआ था, जो अब इस दुनिया में नहीं रहा।

प्रशासन पर उठे सवाल: कब थमेगा कुत्तों का आतंक?

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर नगर कौंसिल और प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या विकराल रूप ले चुकी है, लेकिन न तो नसबंदी अभियान सही से चलाया जा रहा है और न ही कुत्तों को पकड़ने की कोई ठोस व्यवस्था है। मासूम की मौत के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है।