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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में आम की खुशबू महकने लगती है। लेकिन मधुमेह (Diabetes) रोगियों के लिए आम का नाम सुनते ही सबसे पहले मन में शुगर लेवल बढ़ने का डर आता है। क्या वाकई मधुमेह में आम खाना 'जहर' के समान है? प्रसिद्ध जीवनशैली विशेषज्ञ ल्यूक कौटिन्हो और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, आम से पूरी तरह परहेज करने की जरूरत नहीं है, बस इसे खाने का तरीका सही होना चाहिए।

क्या आम वाकई खतरनाक है?

विशेषज्ञों का मानना है कि आम में प्राकृतिक मिठास (Natural Sugar) और कैलोरी अधिक होती है, लेकिन इसमें कई ऐसे तत्व भी हैं जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं:

मैंगिफेरिन (Mangiferin): आम में मौजूद यह खास यौगिक एंटी-डायबिटिक गुणों से भरपूर होता है।

पोषक तत्व: आम विटामिन-A, C और फाइबर का बेहतरीन स्रोत है।

यदि आपका शुगर लेवल पहले से ही अनियंत्रित है, तो आम नुकसानदेह हो सकता है। लेकिन यदि शुगर नियंत्रण में है, तो आप इसे समझदारी के साथ खा सकते हैं।

आम खाने का 'स्मार्ट तरीका': विशेषज्ञों के 4 टिप्स

अगर आप मधुमेह रोगी हैं और आम खाने के शौकीन हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

1. इसे कभी अकेला न खाएं (Smart Pairing)

ल्यूक कौटिन्हो सलाह देते हैं कि आम को कभी भी खाली पेट या अकेले न खाएं। इसे हमेशा प्रोटीन या हेल्दी फैट्स के साथ मिलाएं, जैसे:

मेवे (बादाम, अखरोट)

बीज (चिया सीड्स, फ्लैक्स सीड्स)

दही के साथ

ऐसा करने से रक्त में शुगर का अवशोषण (Absorption) धीमा हो जाता है और ग्लूकोज अचानक नहीं बढ़ता।

2. मात्रा और समय का रखें ध्यान

मात्रा: एक बार में पूरा आम खाने के बजाय 1-2 छोटे स्लाइस ही लें।

समय: आम खाने का सबसे अच्छा समय दिन का होता है। रात के समय आम खाने से बचें, क्योंकि रात में मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे शुगर लेवल बिगड़ सकता है।

3. 'आम रस' के बजाय फल खाएं

कोशिश करें कि आम को काटकर खाएं। आम का जूस या शेक बनाने से उसका फाइबर खत्म हो जाता है, जिससे शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है। फल के रूप में खाने से फाइबर पाचन को धीमा रखता है।

4. अपने शरीर की सुनें

हर किसी का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है। आम खाने के 2 घंटे बाद अपना शुगर लेवल चेक करें। यदि यह बढ़ता है, तो मात्रा और कम कर दें या अपने डॉक्टर से सलाह लें।