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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। 28 फरवरी को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) के जरिए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का आदेश देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब अचानक शांति और सम्मान की भाषा बोलना शुरू कर दिया है।

'टाइम पत्रिका' को दिए एक ताजा साक्षात्कार में ट्रंप के बयानों ने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है।

1. "ईरानी लड़ाकू नहीं, कुशल वार्ताकार हैं"

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जनता की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे बहुत मजबूत हैं और बड़ी से बड़ी पीड़ा सहने की क्षमता रखते हैं। ट्रंप ने कहा:

"मैं ईरानी लोगों का सम्मान करता हूँ। वे बहुत शक्तिशाली हैं। मेरा मानना है कि वे लड़ाकू स्वभाव के नहीं, बल्कि बहुत कुशल वार्ताकार (Negotiators) हैं। अब समय आ गया है कि हम मेज पर बैठें और एक समझौता करें।"

यह बयान उन ट्रंप के पिछले रुख से बिल्कुल अलग है, जिन्होंने कुछ ही हफ्ते पहले ईरान पर भीषण सैन्य कार्रवाई का नेतृत्व किया था।

2. इजराइल और नेतन्याहू पर ट्रंप का दावा

युद्ध विराम कब होगा, इस पर ट्रंप ने बेहद आत्मविश्वास के साथ इजराइल का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजराइल उनका एक वफादार सहयोगी है और वह उनकी बात को नहीं टालेगा।

आदेश का पालन: ट्रंप ने दावा किया कि बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार उनके निर्देशों का पालन करेगी।

युद्ध का अंत: उन्होंने कहा, "जब मैं रुकने का फैसला करूँगा, तो इजराइल भी रुक जाएगा। वे तभी तक लड़ेंगे जब तक उन्हें उकसाया जाएगा, लेकिन मेरे कहने पर सैन्य कार्रवाई तुरंत रोक दी जाएगी।"

3. 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की पृष्ठभूमि

इस भीषण युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी, 2026 को हुई थी।

लक्ष्य: ट्रंप ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का आदेश दिया था, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करना था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे।

लीक से नाराजगी: रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप अपने प्रशासन से जानकारी लीक होने के कारण बेहद गुस्से में थे, जिसके बाद उन्होंने 27 फरवरी को ही इस ऑपरेशन के अंतिम चरण का संकेत दे दिया था।

युद्ध के मौजूदा हालात और प्रभाव

ईरान युद्ध के कारण वर्तमान में वैश्विक स्तर पर कई संकट पैदा हो गए हैं:

होर्मुज की नाकेबंदी: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिससे दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है।

डिजिटल और फिजिकल अटैक: ईरान अब खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी कंपनियों जैसे ओरेकल और ऐमजॉन के डेटा सेंटर्स को निशाना बना रहा है।

भारत पर असर: भारत ने ईरान से तेल आयात फिलहाल बंद कर रखा है और अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए 'प्लान बी' पर काम कर रहा है।