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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : राजधानी लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह को बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबोधित किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश पहुंचे देशभर के अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि विधायिका लोकतंत्र की बुनियादी इकाई है। संविधान के संरक्षक के रूप में विधायिका न केवल कानून निर्माण का मंच है, बल्कि समग्र विकास की दिशा तय करने का केंद्र भी है। संविधान के तीन मूल शब्द—न्याय, समता और बंधुता—भारत के लोकतंत्र की आत्मा हैं, जिनकी व्यवहारिक रूपरेखा विधायिका के माध्यम से तय होती है।

विधायिका संवाद और समन्वय की मिसाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय की प्रक्रिया, समतामूलक समाज की योजनाएं और बंधुता का भाव—इन तीनों का समन्वय विधायिका के मंच पर दिखाई देता है। सहमति और असहमति के बीच संवाद से समाधान निकालना ही लोकतंत्र की ताकत है।

लोकतंत्र की सबसे सशक्त संस्था है संसद
सीएम योगी ने कहा कि देश में लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था अत्यंत मजबूत है और पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है। संसद वह मंच है, जहां जनप्रतिनिधियों के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज भी सुनी जाती है। योजनाओं की नींव यहीं से पड़ती है। पांच बार लोकसभा सदस्य रहे मुख्यमंत्री ने अपने संसदीय अनुभव साझा करते हुए कहा कि संसद की कार्यप्रणाली से विधानसभा और विधान परिषद को भी संचालन में सहजता मिल सकती है।

प्रश्नकाल सुधार से बढ़ी जनप्रतिनिधियों की भागीदारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2022 में विधानसभा अध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद प्रश्नकाल को संसद की तर्ज पर अधिक प्रभावी बनाया गया। अब सवा घंटे के प्रश्नकाल में सभी 20 तारांकित प्रश्न और अनुपूरक प्रश्न पूछे जाते हैं, जिससे सदन में अधिक जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि संसद हमारे लिए प्रेरणा है और उसके प्रति श्रद्धा हर भारतवासी का दायित्व है।

एक भाव, एक भंगिमा के साथ सोचता है भारत
प्रधानमंत्री के कथन ‘भारत लोकतंत्र की जननी है’ का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने कहा कि देश भले ही विविधताओं से भरा हो, लेकिन सोच और आस्था एक है। संसद इस साझा आस्था को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है।

‘विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश’ पर 24 घंटे मंथन
मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में पारित छह प्रस्तावों को सराहनीय बताते हुए कहा कि ‘विजन 2047’ के तहत विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। ‘विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश’ विषय पर सत्तापक्ष और विपक्ष के 300 से अधिक सदस्यों ने 24 घंटे तक चर्चा की। इस दौरान आए सुझावों को अत्यंत उपयोगी बताया गया।

वर्ष में 30 बैठकों के प्रस्ताव को बताया प्रेरणादायी
सीएम ने यूपी विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही की प्रशंसा करते हुए कहा कि वर्ष में कम से कम 30 बैठकों का प्रस्ताव न केवल संसद और विधानसभा, बल्कि नगर निकायों और पंचायतों के लिए भी प्रेरणा बनेगा। तकनीक के युग में यूपी ने ई-विधान लागू कर विधानसभा, परिषद, कैबिनेट और बजट को पूरी तरह पेपरलेस बना दिया है।

ज्वलंत मुद्दों पर सतत चर्चा की परंपरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी विधानसभा-परिषद में ज्वलंत मुद्दों और सतत विकास लक्ष्यों पर लगातार लंबी चर्चा होती रही है। संविधान दिवस पर मौलिक अधिकारों के साथ मूल कर्तव्यों पर भी संवाद को ब्लॉक और पंचायत स्तर तक ले जाने का आह्वान किया गया है।

98 लाख सुझावों से आकार ले रहा विजन डॉक्यूमेंट
‘विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश’ अभियान के तहत पोर्टल पर 98 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं। सीएम ने बताया कि आईआईटी कानपुर के सहयोग से एआई टूल के माध्यम से इन सुझावों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिससे भविष्य की कार्ययोजना को ठोस दिशा मिलेगी।

प्रोएक्टिव अप्रोच से मजबूत होता है लोकतंत्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीठ और सरकार का दृष्टिकोण प्रोएक्टिव होना चाहिए। संतुलन बनाकर विपक्ष को अवसर देना लोकतांत्रिक मजबूती का संकेत है। उन्होंने पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलनों को ‘सीखो-सिखाओ’ का मंच बताया।
समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह सहित विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।