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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बच्चों में कैंसर का नाम सुनते ही माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। हालांकि, वयस्कों की तुलना में बच्चों में कैंसर के मामले कम होते हैं, लेकिन भारत में हर साल 50,000 से 75,000 नए मामले सामने आना एक गंभीर चिंता का विषय है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बचपन के कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती इसके लक्षणों का 'साधारण' दिखना है। अक्सर माता-पिता बार-बार आने वाले बुखार या थकान को आम संक्रमण समझ लेते हैं, जिससे सही इलाज में देरी हो जाती है।

शुरुआती लक्षणों की पहचान: क्या कहता है विज्ञान?

बचपन के कैंसर, जैसे ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) और लिंफोमा, के लक्षण बहुत ही हल्के और भ्रमित करने वाले हो सकते हैं। डॉ. श्रवण के अनुसार, यदि कोई भी असामान्य लक्षण 2 सप्ताह से अधिक समय तक बना रहता है, तो उसे खतरे की घंटी समझना चाहिए।

इन 7 चेतावनी संकेतों पर रखें पैनी नज़र

अकारण और बार-बार बुखार: यदि बच्चे को बिना किसी स्पष्ट संक्रमण (जैसे सर्दी-खांसी) के बार-बार बुखार आ रहा है और वह दवाइयों से ठीक नहीं हो रहा, तो यह ल्यूकेमिया का संकेत हो सकता है।

शरीर पर गांठ या सूजन: गर्दन, बगल (Armpits), पेट या जांघों के पास बिना दर्द वाली कोई भी सख्त गांठ जो धीरे-धीरे बढ़ रही हो।

असामान्य रक्तस्राव: मसूड़ों से खून आना, बार-बार नाक से खून बहना या त्वचा पर बिना चोट लगे नीले-लाल धब्बे (Petechiae) पड़ना।

हड्डियों और जोड़ों में दर्द: यदि बच्चा रात में अचानक पैरों या जोड़ों में दर्द की शिकायत करे या चलते समय लंगड़ाने लगे, तो इसे 'ग्रोइंग पेन' समझकर नज़रअंदाज़ न करें।

आंखों में सफेद चमक: यदि कैमरे की फ्लैश वाली फोटो में बच्चे की पुतली काली या लाल दिखने के बजाय सफेद चमकती हुई दिखाई दे, तो यह 'रेटिनोब्लास्टोमा' (आंखों का कैंसर) हो सकता है।

सुबह का सिरदर्द और उल्टी: यदि बच्चा सुबह उठते ही सिरदर्द की शिकायत करता है और साथ में उसे उल्टी होती है, तो यह ब्रेन ट्यूमर का शुरुआती लक्षण हो सकता है।

अत्यधिक थकान और पीलापन: बच्चा यदि खेलने-कूदने के बजाय हमेशा लेटा रहे, जल्दी थक जाए और उसका चेहरा पीला दिखने लगे (खून की कमी के कारण), तो तुरंत जांच कराएं।

निदान और उपचार: 80% बच्चे हो सकते हैं पूरी तरह ठीक

राहत की बात यह है कि बचपन का कैंसर लाइलाज नहीं है। आधुनिक चिकित्सा और सही समय पर पहचान से 80 प्रतिशत से अधिक बच्चों को पूरी तरह स्वस्थ किया जा सकता है।

माता-पिता क्या करें?

सतर्कता ही सुरक्षा है: लक्षणों के चार्ट को समझें और बच्चे की गतिविधियों पर ध्यान दें।

डॉक्टर से परामर्श: यदि लक्षण बने रहते हैं, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) से मिलें। डॉक्टर अक्सर शुरुआती जांच के लिए CBC (Complete Blood Count) या इमेजिंग (जैसे अल्ट्रासाउंड या MRI) की सलाह देते हैं।

अफवाहों से बचें: हर बुखार कैंसर नहीं होता, लेकिन जांच कराने में कोई बुराई नहीं है।