Prabhat Vaibhav, Digital Desk : पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने वारिस पंजाब दे के प्रमुख और खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह को बड़ा कानूनी झटका दिया है। हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत उसकी लगातार तीसरी हिरासत (Detention) को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि अमृतपाल सिंह को असम की डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में ही रहना होगा।
हाई कोर्ट का फैसला: 'प्रशासनिक निर्णय न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर'
मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुवार को खुली अदालत में अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अमृतपाल सिंह के खिलाफ जारी हिरासत के आदेश पूरी तरह स्पष्ट हैं और सार्वजनिक सुरक्षा एवं देश की अखंडता को ध्यान में रखते हुए लिए गए ये प्रशासनिक निर्णय न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं आते।
अमृतपाल का तर्क: अमृतपाल की ओर से दलील दी गई थी कि उसकी हिरासत 'मजबूत सबूतों' के बिना है और यह उसके मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 21 व 22) का उल्लंघन है।
सरकार का पक्ष: पंजाब सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अनुपम गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि अमृतपाल के संबंध खतरनाक आतंकवादियों और गैंगस्टरों से हैं। उन्होंने एक 15 सदस्यीय 'हिट लिस्ट' का भी हवाला दिया, जिससे राज्य की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।
क्यों डिब्रूगढ़ जेल में ही रखना चाहती है सरकार?
पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट में यह दलील भी दी कि अमृतपाल सिंह को पंजाब की किसी जेल में लाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकता है। सरकार का कहना है कि उसकी गतिविधियों के कारण पहले भी राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ चुकी है। इसी कारण उसे असम की सुरक्षित जेल में रखकर ही जांच और सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाना उचित है।
मामले का घटनाक्रम:
मार्च 2023: अमृतपाल सिंह के खिलाफ पहला एनएसए हिरासत आदेश पारित हुआ।
अप्रैल 2023: उसे गिरफ्तार कर असम की डिब्रूगढ़ जेल भेजा गया।
17 अप्रैल 2025: अमृतसर के जिला मजिस्ट्रेट ने तीसरा नया हिरासत आदेश जारी किया।
27 मार्च 2026: हाई कोर्ट ने अमृतपाल की उस पैरोल याचिका को भी खारिज कर दिया था, जिसमें उसने संसद के बजट सत्र में शामिल होने की अनुमति मांगी थी।
16 अप्रैल 2026: हाई कोर्ट ने एनएसए के तहत तीसरी हिरासत को चुनौती देने वाली मुख्य याचिका को खारिज किया।




