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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारतीय राजनीति के अखाड़े में एक बार फिर 'उच्च सदन' यानी राज्यसभा की कुर्सी के लिए बिसात बिछ चुकी है। चुनाव आयोग ने देश के 10 राज्यों की रिक्त हो रही 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी बिगुल फूंक दिया है। इन सीटों के लिए आगामी 16 मार्च को मतदान होगा और उसी शाम नतीजों का एलान कर दिया जाएगा। यह चुनाव न केवल एनडीए (NDA) के लिए अपना दबदबा बढ़ाने का मौका है, बल्कि विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के लिए भी अपनी एकजुटता साबित करने की बड़ी अग्निपरीक्षा है।

किस राज्य में कितनी सीटों पर होगा दंगल?

आगामी 16 मार्च को होने वाले चुनावों का राज्यवार ब्यौरा कुछ इस प्रकार है:

महाराष्ट्र: 7 सीटें

तमिलनाडु: 6 सीटें

बिहार और पश्चिम बंगाल: 5-5 सीटें

ओडिशा: 4 सीटें

असम: 3 सीटें

छत्तीसगढ़, हरियाणा और तेलंगाना: 2-2 सीटें

हिमाचल प्रदेश: 1 सीट

बिहार और महाराष्ट्र: गठबंधन की असली परीक्षा

सबसे दिलचस्प मुकाबला बिहार और महाराष्ट्र में देखने को मिल रहा है। बिहार में 5 सीटों के लिए हो रहे चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 41 वोटों की दरकार होगी। यहां एनडीए के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है, जहां भाजपा अपने सहयोगी दलों—जेडीयू, एलजेपी (आर) और हम (HAM)—के साथ समन्वय बिठाने में जुटी है।

वहीं, महाराष्ट्र की 7 सीटों पर समीकरण काफी उलझे हुए हैं। यहां महायुति गठबंधन (भाजपा, शिंदे सेना और अजित पवार की एनसीपी) के पास बहुमत का आंकड़ा तो है, लेकिन सीटों की दावेदारी को लेकर 'रस्साकशी' बरकरार है। शरद पवार, प्रियंका चतुर्वेदी और रामदास आठवले जैसे दिग्गजों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिससे इन सीटों पर नए चेहरों की एंट्री तय मानी जा रही है।

यूपी-बंगाल और दक्षिण का हाल: कहां किसका पलड़ा भारी?

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी अपनी 4 सीटें बचाने के लिए आश्वस्त है, जबकि भाजपा एक सीट पर सेंध लगाने की तैयारी में है। दक्षिण भारत की बात करें तो तमिलनाडु में डीएमके का दबदबा कायम रहने की उम्मीद है। हालांकि, तेलंगाना में कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है। ओडिशा में नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी के लिए इस बार राह आसान नहीं होगी, क्योंकि भाजपा वहां 3 सीटें जीतने का दम भर रही है।

क्या राज्यसभा में बदलेगा शक्ति संतुलन?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के बाद राज्यसभा में भाजपा की सदस्य संख्या 9 से बढ़कर 12 या उससे अधिक हो सकती है। हरियाणा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भाजपा को बढ़त मिलने के आसार हैं। यदि ऐसा होता है, तो सदन में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सरकार को और भी आसानी होगी। दूसरी ओर, विपक्षी खेमे को कुछ सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है, जिससे उनकी रणनीति पर असर पड़ेगा।