Prabhat Vaibhav, Digital Desk : भारत में भक्ति की लहर केवल आम जनमानस तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लैमर की दुनिया के चमकते सितारे भी अब अपनी जड़ों और आध्यात्मिकता की ओर लौट रहे हैं। उज्जैन की महाकाल नगरी से लेकर पुरी के जगन्नाथ धाम तक, इन दिनों फिल्मी हस्तियों और मशहूर हस्तियों का तांता लगा हुआ है। इस सप्ताह फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन, अभिनेता गोविंदा और युवा अभिनेत्री सारा अर्जुन जैसे सितारों ने मंदिर पहुंचकर ईश्वर का आशीर्वाद लिया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं।
महाकाल की भस्म आरती में शामिल हुए मिलिंद सोमन और पत्नी अंकिता
अपनी बेमिसाल फिटनेस के लिए मशहूर मिलिंद सोमन अपनी पत्नी अंकिता कोनवा के साथ उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। इस जोड़े ने ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में शिरकत की। भगवान शिव को समर्पित यह आरती जीवन और मृत्यु के चक्र का प्रतीक मानी जाती है। मिलिंद सोमन, जो हमेशा मानसिक शांति और शारीरिक संतुलन की बात करते हैं, उन्होंने इस अनुभव को अत्यंत शांतिपूर्ण बताया।
युवा पीढ़ी में बढ़ता क्रेज: सारा अर्जुन ने किए दर्शन
केवल अनुभवी कलाकार ही नहीं, बल्कि 'जेन-जी' (Gen-Z) के सितारों में भी भक्ति का गहरा आकर्षण देखा जा रहा है। युवा अभिनेत्री सारा अर्जुन ने भी उज्जैन पहुंचकर महाकाल के दर्शन किए। तड़के 3:30 बजे होने वाली भस्म आरती में शामिल होना किसी भी युवा कलाकार के लिए एक अनुशासित और आध्यात्मिक अनुभव है। सारा ने इस यात्रा को अपने करियर का सबसे यादगार पल बताया, जो यह दर्शाता है कि नई पीढ़ी ग्लैमर के साथ-साथ अपनी संस्कृति से भी जुड़ रही है।
जगन्नाथ पुरी पहुंचे गोविंदा, मिस इंडिया प्रतियोगियों ने भी लिया आशीर्वाद
उज्जैन के साथ-साथ पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भी सितारों की मौजूदगी रही। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता गोविंदा ने पारंपरिक वस्त्र धारण कर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लिया। वहीं, फेमिना मिस इंडिया 2026 की प्रतियोगियों ने ग्रैंड फिनाले से ठीक पहले पुरी का दौरा किया। पारंपरिक 'पटा साड़ियों' में सजी इन सुंदरियों ने कोणार्क सूर्य मंदिर और चंद्रभागा बीच का भी दौरा किया। बता दें कि इस प्रतियोगिता का ग्रैंड फिनाले 18 अप्रैल को आयोजित होने वाला है।
आस्था या दिखावा? विशेषज्ञों की राय
मशहूर हस्तियों के इन दौरों ने एक नई चर्चा को भी जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तीर्थयात्राएं केवल सोशल मीडिया पर फोटो डालने का जरिया नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह आत्मचिंतन और मानसिक स्थिरता का मार्ग हैं। सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भी सुकून की तलाश में इन पवित्र स्थलों पर पहुंचना यह साबित करता है कि असली शांति अध्यात्म में ही निहित है।




