Prabhat Vaibhav, Digital Desk : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गरमागरमी बढ़ने वाली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 30 अप्रैल को उत्तर प्रदेश विधानमंडल का विशेष सत्र (द्वितीय सत्र) आमंत्रित किया है। इस सत्र का मुख्य एजेंडा 'नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक' (महिला आरक्षण विधेयक) को लेकर विपक्ष के रुख की कड़ी निंदा करना है। सरकार इस सत्र के माध्यम से दोनों सदनों में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कराएगी, जिससे सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक भिड़ंत होने के आसार हैं।
विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव: सरकार की बड़ी रणनीति
दरअसल, परिसीमन के साथ महिला आरक्षण विधेयक के लोक सभा में पारित न हो पाने के मुद्दे को लेकर योगी सरकार ने हमलावर रुख अख्तियार किया है। सरकार का तर्क है कि विपक्ष के नकारात्मक रवैये के कारण इस ऐतिहासिक कदम में बाधा आ रही है। इसी के विरोध में 30 अप्रैल को विधान सभा और विधान परिषद में निंदा प्रस्ताव का संकल्प पेश किया जाएगा। इस विशेष सत्र की अधिसूचना विधान सभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे और विधान परिषद के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश सिंह द्वारा मंगलवार को जारी कर दी गई है।
राज्यपाल की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी
इस विशेष सत्र को बुलाने की तैयारी काफी तेजी से की गई। सरकार ने 19 अप्रैल (रविवार) को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद सोमवार को राज्यपाल की स्वीकृति के लिए फाइल भेजी गई। मंगलवार को राज्यपाल की मुहर लगते ही सत्र की औपचारिक घोषणा कर दी गई। सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले, यानी 29 अप्रैल को विधान सभा की कार्यमंत्रणा समिति की बैठक होगी, जिसमें चर्चा की रूपरेखा और समय तय किया जाएगा।
मिशन 2027 और महिला वोटर पर फोकस
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विशेष सत्र के जरिए योगी सरकार 'महिला सशक्तिकरण' के मुद्दे पर विपक्ष को बैकफुट पर धकेलना चाहती है। उत्तर प्रदेश में महिला वोट बैंक की निर्णायक भूमिका को देखते हुए बीजेपी इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की योजना बना रही है। सत्र के दौरान न केवल विधायी कार्य होंगे, बल्कि सरकार विपक्ष को महिला विरोधी साबित करने के लिए सदन में पुरजोर तरीके से अपना पक्ष रखेगी।




