दिन में खेलते-दौड़ते हैं, लेकिन सूरज ढलते ही बन जाते हैं 'पत्थर'! जानिए पाकिस्तान के इन रहस्यमयी 'सोलर किड्स' का चौंकाने वाला सच

दिन में खेलते-दौड़ते हैं, लेकिन सूरज ढलते ही बन जाते हैं 'पत्थर'! जानिए पाकिस्तान के इन रहस्यमयी 'सोलर किड्स' का चौंकाने वाला सच

चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) की दुनिया में कई बार ऐसे अजीबोगरीब और असाधारण मामले सामने आते हैं, जो बड़े से बड़े डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को भी हैरत में डाल देते हैं। एक ऐसा ही बेहद रहस्यमयी और दुर्लभ मामला पाकिस्तान से सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया के मेडिकल एक्सपर्ट्स का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

यहाँ दो ऐसे सगे भाई हैं जो दिन के उजाले में तो आम बच्चों की तरह सामान्य रूप से हंसते, खेलते और दौड़ते-भागते हैं, लेकिन जैसे ही शाम होती है और सूरज ढलता है, उनका पूरा शरीर पूरी तरह बेजान और 'पत्थर' जैसा (लकवाग्रस्त) हो जाता है। वे न तो अपनी उंगली हिला पाते हैं और न ही बिना सहारे के बैठ पाते हैं। स्थानीय लोग और मीडिया इन्हें 'सोलर किड्स' (Solar Kids) के नाम से पुकारते हैं। आइए जानते हैं क्या है इस अनोखी बीमारी के पीछे का असली वैज्ञानिक सच।

कौन हैं ये 'सोलर किड्स' और क्या हैं इनके लक्षण?

यह मामला पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा शहर के पास एक गांव का है। यहाँ रहने वाले दो भाई—शोएब अहमद और अब्दुल रशीद—इस अजीबोगरीब स्थिति से पीड़ित हैं।

  • दिन का सामान्य जीवन: सुबह सूरज उगने के साथ ही ये बच्चे पूरी तरह एक्टिव हो जाते हैं। वे स्कूल जाते हैं, क्रिकेट खेलते हैं और अपनी दैनिक गतिविधियां बिल्कुल सामान्य बच्चों की तरह पूरी ऊर्जा के साथ करते हैं।

  • सूरज ढलते ही पैरालिसिस: जैसे ही आसमान में शाम का धुंधलका छाने लगता है और सूरज पूरी तरह अस्त हो जाता है, दोनों भाइयों की ऊर्जा अचानक खत्म होने लगती है। वे एक वनस्पति (Vegetative State) जैसी स्थिति में चले जाते हैं। उनका शरीर पूरी तरह से पैरालिसिस का शिकार हो जाता है। वे न तो कुछ बोल पाते हैं, न आंखें खोल पाते हैं और न ही कुछ खा पाते हैं। सुबह सूरज की पहली किरण निकलने तक वे इसी अचेत अवस्था में पड़े रहते हैं।

क्या इनका संबंध सचमुच 'धूप और सौर ऊर्जा' से है?

शुरुआत में बच्चों के माता-पिता और स्थानीय ग्रामीणों का मानना था कि इनके शरीर का सीधा संबंध सूर्य देव या सौर ऊर्जा (Solar Energy) से है। उनका सोचना था कि ये बच्चे सूरज की धूप से चार्ज होते हैं और धूप न मिलने पर डिस्चार्ज हो जाते हैं।

हालांकि, जब पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) के डॉक्टरों की एक टीम ने इन बच्चों को अपनी देखरेख में रखा, तो इस अंधविश्वास का पर्दाफाश हो गया:

डॉक्टरों का टेस्ट: डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को दिन के समय एक पूरी तरह से अंधेरे कमरे में बंद कर दिया, जहाँ सूरज की एक किरण भी नहीं पहुंच सकती थी। इसके बावजूद, दिन के समय बच्चे उस अंधेरे कमरे में भी सामान्य रूप से चलते-फिरते और खेलते रहे। इससे यह साबित हो गया कि इस बीमारी का संबंध सूरज की धूप या रोशनी से बिल्कुल भी नहीं है

चिकित्सा विज्ञान का खुलासा: क्या है यह दुर्लभ बीमारी?

कंटीन्यूअस मेडिकल रिसर्च और जेनेटिक टेस्टिंग के बाद डॉक्टरों ने पाया कि यह एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर (Neurological Disorder) है।

  • कांगड़ेनिटल मायस्थेनिया सिंड्रोम (Congenital Myasthenic Syndrome - CMS): विशेषज्ञों के मुताबिक, यह एक आनुवंशिक (Genetic) बीमारी है। यह तब होती है जब माता-पिता के जीन आपस में मेल नहीं खाते या करीबी रिश्तेदारों में शादी (Consanguineous Marriage) होने के कारण बच्चों के जीन में म्यूटेशन हो जाता है।

  • न्यूरोट्रांसमीटर की कमी: दिनभर की शारीरिक गतिविधियों के बाद, शाम होते-होते इन बच्चों के शरीर में तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मांसपेशियों के बीच सिग्नल भेजने वाला केमिकल (एसिटाइलकोलाइन) पूरी तरह समाप्त हो जाता है। इसके कारण दिमाग मांसपेशियों को काम करने का संदेश नहीं भेज पाता और शरीर बिल्कुल निष्क्रिय हो जाता है। रातभर आराम करने के बाद यह केमिकल दोबारा रीचार्ज हो जाता है, जिससे वे सुबह फिर से ठीक हो जाते हैं।

इलाज के बाद जिंदगी में आया सुधार

पाकिस्तानी सरकार और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संगठनों की मदद से इन बच्चों का महीनों तक मुफ्त इलाज चला। डॉक्टरों ने एक विशेष दवाओं का कॉम्बिनेशन (Medical Therapy) तैयार किया, जिसके नियमित सेवन से बच्चों की स्थिति में भारी सुधार देखा गया है। अब वे दवाइयों के सहारे सूरज ढलने के बाद भी रात के समय कुछ हद तक अपनी सामान्य गतिविधियों को अंजाम देने में सक्षम हो पा रहे हैं।

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