भाद्रपक्ष की दशमीं: मारवाड़ के लोकपर्वों पर कोरोना का साया, मेलों की रंगत पर फिरा पानी

प्रतिवर्ष मारवाड़ में बाबा दसमीं पर तीन मेलों का चरम रहता है। इस साल कोरोना के कारण सभी मंदिरों के पट् बंद पड़े है। हालांकि प्रदेश सरकार ने अनलॉक 4 में आगामी 7 सितंबर से मंदिरों को खोलने की इजाजत दी है।

जोधपुर।। भाद्रपक्ष के शुक्ल पक्ष की दसमीं पर मारवाड़ में प्रतिवर्ष तीनों मेलों का उत्साह छाया रहता है। इस बार ऐसा नहीं हो पाया। कोरोना के साए में मेलों की रंगत पर पानी फिर गया। लोकदेवता बाबा रामदेव, खेजड़ली का शहीदी मेला और खरनाल का प्रसिद्ध वीर तेजाजी की याद में भरा जाने वाला मेला आज श्रद्धालुओं को तरस गए। कोरोना संक्रमण पर मेला का उत्साह लोगों में नजर नहीं आया। अलसुबह यहां पर आरती और भोग लगाने का कार्यक्रम तो हुआ मगर श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों के पट् नहीं खुल पाए।

प्रतिवर्ष मारवाड़ में बाबा दसमीं पर तीन मेलों का चरम रहता है। इस साल कोरोना के कारण सभी मंदिरों के पट् बंद पड़े है। हालांकि प्रदेश सरकार ने अनलॉक 4 में आगामी 7 सितंबर से मंदिरों को खोलने की इजाजत दी है। मगर भाद्रपक्ष की शुक्ल पक्ष दसमीं पर भरे जाने वाले तीन मारवाड़ के लोक पर्व सूने सूने ही नजर आए।

जोधपुर के मसूरिया बाबा रामदेव मंदिर में जहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस दिन बाबा को धोक लगाने आते है, मगर इस बार ऐसा नहीं हो पाया। पोकरण में बाबा रामदेव के समाधि स्थल पर भी ऐसा कुछ नहीं हो पाया। अलसुबह जोधपुर में बाबा रामदेव मंदिर में अखंड ज्योत से आरती हुई तो प्रसादी का भोग भी लगाया गया। बाबा के गुरू बालीनाथ की समाधिस्थल पर कुछ पुजारियों ने धोक लगाने के साथ विशेष रूप से आरती अर्चना की। भक्तों के लिए ऑन लाइन दर्शन की व्यवस्था रखी गई।

शहीदी खेजड़ली मेला-

पेड़ों की रक्षार्थ अपनी जान गंवाने वाले 363 शहीदों की याद में यह मेला खेजड़ली गांव में प्रतिवर्ष उत्साह से मनाया जाता है। शहीदों की याद में दिन भर चहलपहल रहती है। विश्रोई समाज में इस मेले को लेकर प्रतिवर्ष उत्साह छाया रहता है। कोरोना के साए में यह मेला भी आज अपनी रंगत खो गया। ना तो मेला भर पाया और ना ही श्रद्धालु इस बार जुट पाए। बरसों पहले खेजड़ली गांव में पेड़ों के लिए अपनी जान गंवाने वाले 363 लोगों की याद में यह मेला भरता है। इस बार प्रबंधन ने इसे स्थिगित कर दिया। ना झूल दिखे और ना ही इनका आनंद लेने वाले। ना चाट पकौड़ी सजी ना ही कुल्फियों के ठेले लगे।

पशु प्रेम का प्रतीक वीर तेजाजी मेला भी सूना-

पशु प्रेम का प्रतीत वीर तेजाजी मेला नागौर जिले के खरनाल गांव में प्रतिवर्ष भरता है। वीर तेजाजी की याद में दसमीं पर यह मेला अपनी रंगत पर होता है। कोरोना ने इसकी भी रंगत को लील दिया। खरनाल में भरा जाने वाला यह मेला घोड़ा दौड़ के लिए मशहूर है। जाट के साथ अन्य समाज के लोग इसे उत्साह से मनाते आए है। मेला स्थल पर इस बार पूरी तरह सूनापन नजर आया।

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