गयाजी के सर्किट हाउस में AC फटने से लगी आग, बाल-बाल बचे विदेश मंत्रालय के डायरेक्टर, स्पीकर प्रेम कुमार पहुंचे
बिहार के ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण शहर गयाजी से इस वक्त एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। गयाजी के वीआईपी सर्किट हाउस में उस वक्त अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई जब अचानक एक कमरे में लगा एयर कंडीशनर यानी एसी तेज धमाके के साथ फट गया और देखते ही देखते कमरे में भीषण आग भड़क उठी। गनीमत यह रही कि इस भयानक हादसे के वक्त कमरे में मौजूद विदेश मंत्रालय के डायरेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बाल-बाल बच गए और उन्हें समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, अन्यथा एक बहुत बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता था। इस घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया और बिहार विधानसभा के अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक डॉ. प्रेम कुमार तुरंत मौके पर पहुंचे तथा स्थिति का जायजा लिया। वीआईपी सर्किट हाउस जैसी सुरक्षित और अत्याधुनिक मानी जाने वाली जगह पर इस तरह की गंभीर तकनीकी लापरवाही सामने आने के बाद अब सुरक्षा व्यवस्था और रख-रखाव के दावों पर बहुत बड़े सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
गयाजी के वीआईपी सर्किट हाउस में कैसे और किन परिस्थितियों में हुआ यह भयानक हादसा
घटनास्थल से मिल रही शुरुआती और विस्तृत जानकारी के अनुसार, गयाजी का यह सर्किट हाउस अक्सर देश के बड़े-बड़े राजनेताओं, केंद्रीय मंत्रियों, विदेशी मेहमानों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के ठहरने का मुख्य केंद्र माना जाता है। रविवार या सामान्य दिनों की तरह ही इस बार भी कई वीआईपी और केंद्रीय विभागों के अधिकारी यहां रुके हुए थे, जिनमें विदेश मंत्रालय के डायरेक्टर स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे जो अपने आधिकारिक दौरे पर गयाजी आए हुए थे। अधिकारी अपने कमरे में आराम कर रहे थे या अपने जरूरी कार्यों में व्यस्त थे, तभी अचानक से दीवार पर लगे एसी के भीतरी हिस्से में शॉर्ट सर्किट हुआ और जोरदार धमाके के साथ उसमें आग लग गई। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि सर्किट हाउस के दूसरे कमरों में ठहरे अन्य अधिकारी भी सहमकर बाहर निकल आए। चंद ही पलों में कमरे से काले धुएं का गुबार निकलने लगा और लपटें तेजी से फैलने लगीं, जिससे वहां मौजूद कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए।
विदेश मंत्रालय के डायरेक्टर की सूझबूझ और समय पर बचाव कार्य से टला बड़ा संकट
इस आकस्मिक और डरावनी दुर्घटना के दौरान सबसे राहत भरी बात यह रही कि विदेश मंत्रालय के डायरेक्टर और सर्किट हाउस के कर्मचारियों ने अत्यधिक संकट के क्षणों में घबराने के बजाय त्वरित सूझबूझ का परिचय दिया। जैसे ही एसी से धुआं उठना शुरू हुआ, उन्होंने तुरंत कमरे की बिजली काट दी और बिना एक भी पल गंवाए कमरे से सुरक्षित बाहर निकल आए। यदि आग लगने के तुरंत बाद यह सतर्कता न बरती जाती, तो धुआं और जहरीली गैसें कमरे में फैलने से डायरेक्टर की जान खतरे में पड़ सकती थी। सर्किट हाउस के अन्य कर्मचारियों ने तुरंत फायर एक्सटिंग्विशर यानी आग बुझाने वाले यंत्रों की मदद से आग पर काबू पाने की शुरुआती कोशिशें शुरू कर दीं, और कुछ ही देर में दमकल विभाग (Fire Brigade) की गाड़ियां भी सायरन बजाते हुए मौके पर पहुंच गईं। दमकल कर्मियों की मुस्तैदी के कारण आग को आसपास के अन्य कमरों तक फैलने से पूरी तरह रोक लिया गया, जिससे एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय स्तर का हादसा टल गया।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष और स्थानीय विधायक डॉ. प्रेम कुमार पहुंचे सर्किट हाउस
इस हाई-प्रोफाइल हादसे की खबर जैसे ही स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक पहुंची, वैसे ही राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष और गया के कद्दावर नेता डॉ. प्रेम कुमार तुरंत अपनी तमाम व्यस्त irculars और बैठकों को छोड़कर सीधे गयाजी के उस सर्किट हाउस पहुंचे जहां यह दुर्घटना घटी थी। उन्होंने मौके पर पहुंचकर जल चुके कमरे का बारीकी से निरीक्षण किया और वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों, प्रशासनिक अमले तथा सर्किट हाउस के प्रबंधकों से एक-एक बात की पूरी जानकारी ली। डॉ. प्रेम कुमार ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वीआईपी और सरकारी मेहमानों के ठहरने वाले स्थानों पर इस तरह की लापरवाही बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को यह कड़े निर्देश दिए कि वे तत्काल प्रभाव से सर्किट हाउस के सभी कमरों में लगे एसी, बिजली की फिटिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की टेक्निकल जांच करवाएं ताकि भविष्य में इस तरह की खतरनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
प्रशासनिक लापरवाही और सर्किट हाउस के मेंटेनेंस पर उठ रहे गंभीर सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद गयाजी के स्थानीय नागरिकों और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और हर कोई यह पूछ रहा है कि आखिर करोड़ों रुपए के बजट वाले सर्किट हाउस में उपकरणों की नियमित जांच क्यों नहीं की जाती है। यदि कोई वीआईपी मेहमान या आम नागरिक इस तरह की लापरवाही का शिकार हो जाता, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती? जानकारों का कहना है कि अधिकांश सरकारी विश्राम ग्रहों और सर्किट हाउसों में लगे एसी और अन्य उपकरण कई-कई साल पुराने हो जाते हैं और समय पर उनका मेंटेनेंस या सर्विसिंग नहीं कराई जाती है, जिसके कारण वायरिंग पर अत्यधिक लोड पड़ने से शॉर्ट सर्किट और धमाके जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। इस घटना ने एक बार फिर से सरकारी भवनों के रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर एक बहुत बड़ा आईना दिखाया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भविष्य के लिए सबक और सुरक्षा मानकों को पुख्ता करने की सख्त जरूरत
गयाजी के सर्किट हाउस में हुई यह घटना भले ही एक बड़ा नुकसान होने से टल गई हो, लेकिन यह प्रशासन के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी और वेक-अप कॉल है। देश-विदेश से गयाजी आने वाले पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और वीआईपी मेहमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की सबसे पहली और प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उम्मीद की जानी चाहिए कि डॉ. प्रेम कुमार के हस्तक्षेप के बाद अब न केवल गयाजी के बल्कि पूरे बिहार के सभी सर्किट हाउसों और विश्राम गृहों के बिजली उपकरणों की सघन जांच कराई जाएगी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे ताकि कोई भी मेहमान सुरक्षित माहौल में अपनी यात्रा पूरी कर सके।