बिहार के 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, 50 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम के बदलते मिजाज और बंगाल की खाड़ी से उठे नए मौसमी चक्रवात 'अर्णब' (Cyclone Arnab) को लेकर बिहार में गंभीर चक्रवाती संकट मंडराने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र पटना (IMD Patna) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी ताजा अलर्ट के बाद राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से हरकत में आ गया है। इस संभावित चक्रवाती तूफान अर्णब के सीधे असर के कारण बिहार के कम से कम 6 पूर्वी और दक्षिणी जिलों में मूसलाधार बारिश, वज्रपात (आकाशीय बिजली) और भारी तबाही की आशंका जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, तूफान के प्रभाव से राज्य के प्रभावित इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से तेज पछुआ हवाएं चल सकती हैं, जो कच्चे मकानों, पेड़ों, होर्डिंग्स और बिजली के तारों को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों (DM) को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश जारी किए हैं, जिससे तटीय और निचले इलाकों में रह रहे लोगों के बीच डर और बेचैनी का माहौल देखा जा रहा है।
चक्रवात अर्णब का बिहार में प्रवेश और मौसम विभाग (IMD) की चेतावनी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र ने तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया है और यह चक्रवाती तूफान 'अर्णब' के रूप में तेजी से उत्तर-पश्चिमी दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि इस तूफान का मुख्य केंद्र तटीय क्षेत्रों में रहने की संभावना है, लेकिन इसके आउटर बैंड्स और चक्रवाती नमी के कारण बिहार के वायुमंडल में अचानक बड़ा बदलाव आ गया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 24 से 48 घंटों के दौरान बिहार के आसमान में काले घने बादलों का डेरा रहेगा। इसके परिणामस्वरूप न केवल तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी, बल्कि राज्य के कई हिस्सों में अचानक तेज गरज-चमक के साथ आंधी-तूफान का दौर शुरू हो जाएगा।
बिहार के इन 6 जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट: जनजीवन हो सकता है अस्त-व्यस्त
मौसम विभाग ने जिन 6 जिलों को अर्णब तूफान के सीधे प्रभाव क्षेत्र में चिन्हित किया है, उनमें भागलपुर, बांका, कटिहार, पूर्णिया, अररिया और किशनगंज शामिल हैं। इन जिलों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। स्थानीय मौसम केंद्र का अनुमान है कि इन इलाकों में कुछ ही घंटों के भीतर 100 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की जा सकती है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इसके अलावा पटना, गया, नालंदा, मुंगेर, जमुई और खगड़िया जैसे पड़ोसी जिलों में भी 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज तूफानी हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश और मेघगर्जन का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
50 KM की रफ्तार से चलेंगी आंधी हवाएं: पेड़ गिरने और बिजली व्यवस्था ठप होने का खतरा
चक्रवात अर्णब के कारण चलने वाली 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार की तेज हवाएं इस तूफान का सबसे खतरनाक पहलू साबित हो सकती हैं। मौसम विभाग के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस गति की तूफानी हवाएं कमजोर निर्माणों, फूस के मकानों, टीन की छतों और सड़कों किनारे लगे बड़े विज्ञापनों को आसानी से उखाड़ फेंक सकती हैं। इसके अलावा आंधी के कारण भारी पेड़ उखड़ने और बिजली के खंभे गिरने की आशंका है, जिससे कई जिलों में घंटों तक बिजली आपूर्ति ठप हो सकती है। बिजली विभाग ने अपने तकनीकी अमले को हाई अलर्ट पर रखा है ताकि आंधी-तूफान रुकते ही प्रभावित लाइनों की मरम्मत का काम तुरंत शुरू किया जा सके।
किसानों की फसलों पर मंडराया संकट: कृषि वैज्ञानिकों ने दी तत्काल ये सलाह
इस चक्रवाती तूफान और बेमौसम मूसलाधार बारिश का सबसे बड़ा झटका बिहार के किसानों को लग सकता है। इस समय खेतों में धान की फसल कटाई के अंतिम चरण में है या कटकर सूखने के लिए खलिहानों में रखी हुई है। इसके साथ ही रबी फसलों जैसे गेहूं, चना, सरसों और दलहन की बुआई का काम भी तेजी से चल रहा था। ऐसे समय में भारी बारिश और तूफानी हवाओं से तैयार धान की फसल के खेतों में बिछ जाने और पानी में डूबने से भारी नुकसान हो सकता है। राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय और बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसल को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं और हाल-फिलहाल में सिंचाई या कीटनाशकों का छिड़काव पूरी तरह रोक दें।
आपदा प्रबंधन विभाग मुस्तैद: NDRF और SDRF की टीमें अलर्ट पर तैनात
चक्रवात अर्णब से पैदा होने वाली किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रभावित होने वाले सभी 6 जिलों में एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को बोट्स और आधुनिक बचाव उपकरणों के साथ मुस्तैद रहने का आदेश दिया गया है। जिला प्रशासनों को नियंत्रण कक्ष (Control Room) 24 घंटे चालू रखने और नदियों के जलस्तर पर पैनी नजर रखने को कहा गया है। इसके अलावा आम जनता से अपील की गई है कि वे आंधी-तूफान और बारिश के दौरान बड़े पेड़ों के नीचे या जर्जर इमारतों के आसपास शरण न लें तथा बिजली चमकने के समय पक्के मकानों के भीतर ही सुरक्षित रहें।