कोरोना महामारी में कालाबाजारी का भांडाफोड, 35 हजार रुपये में बेचा जा रहा है नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन!

लोग अपनो की जान बचाने के लिए कभी ऑक्सीजन, कभी बेड तो कभी इंजेक्शन के लिए खुद मारे-मारे फिर रहे हैं।

भिवानी।। भिवानी में रुपयों की लालच में आपदा को अवसर बनाने के गंदे गोरखधंधे का भंड़ाफोड़ हुआ है। ये भंड़ाफोड़ सीआईए-2 पुलिस ने किया है। जिसे शिकायत मिली थी कि एक निजी अस्पताल में रेडमेसिविर इंजेक्शन को 35-35 हजार रुपये में बेचे जा रहे हैं। हैरानी की बात ये भी है कि ये इंजेक्शन नकली बताए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस ने मैडिकल स्टोर संचालक को गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ में बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

एक तरफ देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। हर रोज कोरोना व मौत के आंकडे़ अपने ही रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। लोग अपनो की जान बचाने के लिए कभी ऑक्सीजन, कभी बेड तो कभी इंजेक्शन के लिए खुद मारे-मारे फिर रहे हैं। सरकार व स्वास्थ्य विभाग सिस्टम सुधारने में दिन-रात जुटे हैं, पर जैसे-जैसे सिस्टम व कमियों में सुधार आता है तो जमाखोर व कालाबाजारी करने वाले सिस्टम को बिगाडऩे में कोई कसर नहीं छोड़ते।

बात करें भिवानी की तो यहां सीआईए-2 पुलिस ने रोहतक गेट स्थित एक निजी अस्पताल के मेडिकल स्टोर संचालक इंद्र को रेडमेसिविर इंजेक्शन 35-35 हजार रुपये में बेचने पर गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कालाबाजारी को लेकर सोशल मीडिया पर जानकारी देने के लिए बार-बार अपील की थी।

इसी प्रकार किसी ने सीआईए-2 इंचार्ज इंस्पेक्टर भगवान यादव को जानकारी दी कि उन्हें रेडमेसिविर के दो इंजेक्शन 70 हजार रुपये में दिये गए हैं। छापेमारी में ये बात सिद्ध होने पर पुलिस ने स्टोर संचालक इंद्र को गिरफ्तार किया। मेडिकल स्टोर संचालक व इंजेक्शन काबू कर पुलिस ने ड्रग इंस्पेक्टर को मौके पर बुलाया।

ड्रग इंस्पेक्टर मनीष ग्रोवर ने बताया कि इस रेडमेसिविर इंजेक्शन की किमत 5400 रुपये है जो पुरानी कीमत है। अब ये इंजेक्शन 3700 रुपये की कीमत में आता है। प्राथमिक जांच में ये इंजेक्शन नकली लग रहे है, जिसे जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपित इंद्र से पूछताछ में ऐसी कालाबाज़ारी के और भी कई बड़े ख़ुलासे होने की उम्मीद है।

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