Jio IPO Valuation: 10.3 लाख करोड़ से 11 लाख करोड़ तक पहुंचेगी जियो की वैल्यू

Jio IPO Valuation: 10.3 लाख करोड़ से 11 लाख करोड़ तक पहुंचेगी जियो की वैल्यू

भारतीय शेयर बाजार और टेलीकॉम सेक्टर से इस वक्त की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित खबर सामने आ रही है। देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की अगुवाई वाली डिजिटल और टेलीकॉम दिग्गज कंपनी 'रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स' (Reliance Jio Platforms) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) को लेकर बाजार में सुगबुगाहट अपने चरम पर है। मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज फर्म्स के ताजा अनुमानों के मुताबिक, जियो के इस मेगा आईपीओ के दौरान कंपनी का कुल वैल्यूएशन (Valuation) लगभग 10.3 लाख करोड़ से लेकर 11 लाख करोड़ रुपये (लगभग 114 से 143 बिलियन डॉलर) के बीच आंका जा रहा है। देश के इतिहास के सबसे बड़े आरंभिक सार्वजनिक निर्गमों में से एक माने जा रहे इस आईपीओ को लेकर निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। इस भारी-भरकम वैल्यूएशन के बाद यह साफ हो गया है कि शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद जियो देश की सबसे मूल्यवान और ताकतवर सूचीबद्ध कंपनियों की सूची में सबसे ऊपर अपनी मजबूत जगह बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

संभावित शेयर प्राइस और इश्यू साइज: जानिए निवेशकों को किस कीमत पर मिल सकते हैं शेयर

वित्तीय बाजार से मिल रही रिपोर्टों के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स इस आईपीओ के जरिए लगभग 37,000 करोड़ से 37,800 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है, जो पूरी तरह से फ्रेश इश्यू (Fresh Issue) के रूप में होगा। इसका मतलब यह है कि कंपनी द्वारा जारी किए जाने वाले नए शेयरों से मिलने वाली इस विशाल राशि का उपयोग सीधे तौर पर जियो के व्यावसायिक विस्तार और कर्ज कम करने में किया जाएगा। चर्चा है कि कंपनी अपने शेयरों का मूल्य दायरा (Price Band) लगभग 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर के आसपास तय कर सकती है। चूंकि यह भारत के टेलीकॉम और डिजिटल इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा शेयर बाजार डेब्यू हो सकता है, इसलिए रिटेल निवेशकों से लेकर बड़े संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं कि कंपनी किस सटीक बैंड और लॉट साइज के साथ बाजार में उतरती है।

कर्ज मुक्त होगी कंपनी और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों पर क्या पड़ेगा इसका असर?

रिलायंस जियो के इस आईपीओ से मिलने वाली कुल राशि में से एक बड़ा हिस्सा (लगभग 27,500 करोड़ रुपये) सब्सिडियरी कंपनी के कर्ज को चुकाने या कम करने में इस्तेमाल किया जाएगा। इस बड़े कदम से जियो की बैलेंस शीट पूरी तरह से कर्ज-मुक्त और मजबूत हो जाएगी, जिससे कंपनी की वित्तीय सेहत में और अधिक सुधार देखने को मिलेगा। इस पूरी प्रक्रिया के बाद मूल कंपनी 'रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड' (RIL) के पास जियो की लगभग 64.48% हिस्सेदारी सुरक्षित बनी रहेगी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जियो के अलग से लिस्ट होने से 'वैल्यू अनलॉकिंग' (Value Unlocking) की प्रक्रिया तेज होगी, जिसका सीधा और सकारात्मक फायदा रिलायंस के करोड़ों शेयरधारकों को लॉन्ग-टरम में मिलने की पूरी उम्मीद है।

निवेशकों के लिए क्या है बड़ा संदेश, क्या जियो के शेयरों में पैसा लगाना होगा फायदेमंद?

जियो के इस मेगा आईपीओ के आने से न केवल भारतीय टेलीकॉम बाजार में एक नया पारदर्शिता का पैमाना स्थापित होगा, बल्कि एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों के वैल्यूएशन को भी नई दिशा मिलेगी। हालांकि जानकारों का यह भी मानना है कि किसी भी होल्डिंग कंपनी की तरह रिलायंस पर थोड़ा बहुत होल्डिंग डिस्काउंट असर डाल सकता है, लेकिन जियो की बाजार में मजबूत पकड़, डेटा क्रांति और भविष्य की तकनीकी संभावनाओं को देखते हुए विश्लेषक इसे एक बेहतरीन निवेश अवसर मान रहे हैं। यदि आप भी इस आईपीओ में दांव लगाने की सोच रहे हैं, तो अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेकर कंपनी के आधिकारिक ड्राफ्ट और रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) के आने का इंतजार जरूर करें ताकि आपको सटीक और आधिकारिक आंकड़ों की पूरी जानकारी मिल सके।