RBI MPC Meeting: लोन की किस्त कितनी बढ़ेगी? थोड़ी देर में खुलेगा राज

RBI MPC Meeting: लोन की किस्त कितनी बढ़ेगी? थोड़ी देर में खुलेगा राज

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की चल रही उच्चस्तरीय बैठक के नतीजे अब बस कुछ ही पलों में दुनिया के सामने आने वाले हैं, जिसने देश भर के करोड़ों लोन धारकों, गृहस्वामी खरीदारों और आम मध्यमवर्गीय परिवारों की धड़कनों को पूरी तरह से बढ़ा दिया है। आज आने वाले इस फैसले को लेकर वित्तीय बाजार से लेकर आम आदमी तक हर कोई टकटकी लगाए बैठा है क्योंकि इस बार के आर्थिक संकेतों और महंगाई के मोर्चे पर मिल रहे आंकड़ों को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि रिजर्व बैंक पिछले करीब साढ़े तीन साल के लंबे अंतराल में पहली बार कोई ऐसा बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठा सकता है जिसका सीधा असर आपकी हर महीने जाने वाली होम लोन या कार लोन की ईएमआई (EMI) पर पड़ना तय है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर द्वारा घोषित होने वाले इन नीतिगत फैसलों से यह साफ हो जाएगा कि आने वाले दिनों में देश की वित्तीय और मौद्रिक चाल किस दिशा में आगे बढ़ने वाली है। आइए इस विशेष और विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि इस बार की आरबीआई एमपीसी बैठक से क्या-क्या बड़े कयास लगाए जा रहे हैं और इसका आम जनता की जेब पर क्या असर पड़ेगा।

क्या है आरबीआई की इस एमपीसी बैठक का पूरा गणित और क्यों हो रही है इतनी चर्चा?

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति देश की अर्थव्यवस्था में महंगाई को काबू में रखने और विकास दर को संतुलित बनाए रखने के लिए हर दो महीने पर समीक्षा बैठक करती है। इस बार की बैठक इसलिए भी बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ महीनों के दौरान खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल तथा खाद्य पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अर्थशास्त्रियों और बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का यह मानना है कि यदि केंद्रीय बैंक महंगाई पर लगाम कसने के लिए नीतिगत दरों में बदलाव का रुख अपनाता है, तो बैंकों के लिए फंड जुटाना महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर आम ग्राहकों को मिलने वाले लोन की ब्याज दरों पर पड़ेगा। यही मुख्य वजह है कि पिछले साढ़े तीन सालों के दौरान ब्याज दरों को एक स्थिर दायरे में रखने के बाद अब बाजार में यह सुगबुगाहट तेज हो गई है कि आरबीआई कोई बहुत बड़ा नीतिगत बदलाव कर सकता है।

साढ़े तीन साल में पहली बार क्या बड़ा कदम उठा सकता है रिजर्व बैंक?

वित्तीय गलियारों में यह चर्चा बहुत जोर पकड़ चुकी है कि रिजर्व बैंक इस बार की समीक्षा बैठक में या तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी का कड़ा रुख अपना सकता है या फिर लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के लिए कुछ ऐसे अभूतपूर्व कदम उठा सकता है जो पिछले साढ़े तीन वर्षों में देखने को नहीं मिले थे। जब पिछली बार दरों में लगातार बदलाव का दौर चल रहा था, तब से लेकर अब तक बाजार एक ठहराव की स्थिति में था, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण अब सेंट्रल बैंक के सामने चुनौतियां फिर से खड़ी हो गई हैं। यदि इस बार दरों में इजाफा किया जाता है, तो बैंकों द्वारा तुरंत अपने एमसीएलआर (MCLR) और रेपो-लिंक्ड लोन की दरों को बढ़ा दिया जाएगा, जिससे पुराने और नए दोनों प्रकार के कर्जदारों की मासिक किस्तें काफी भारी हो जाएंगी।

आपकी जेब पर क्या होगा सीधा असर? लोन की किस्त बढ़ने से कैसे बिगड़ेगा बजट?

करोड़ों लोगों ने अपने सपनों का आशियाना खरीदने या गाड़ियां लेने के लिए बैंकों से लंबे समय के होम और कार लोन ले रखे हैं, जिनकी ईएमआई हर महीने उनके बैंक खाते से कटती है। यदि आरबीआई आज अपनी बैठक में दरों को बढ़ाने का ऐलान करता है, तो बैंकों के पास अपने लोन के ब्याज को महंगा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि आपकी मौजूदा लोन की किस्त या तो बढ़ जाएगी या फिर आपके लोन की अवधि (Loan Tenure) को और अधिक लंबा खींच दिया जाएगा। बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों के बीच लोन की किस्त का बोझ बढ़ जाना आम आदमी के मासिक बजट को पूरी तरह से असंतुलित कर सकता है, जिससे परिवारों की वित्तीय योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

थोड़ी देर में खत्म होगा इंतजार, गवर्नर के भाषण पर टिकी हैं सबकी निगाहें

कुछ ही पलों में रिजर्व बैंक के गवर्नर प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए मौद्रिक नीति समिति के इन तमाम फैसलों की आधिकारिक घोषणा करेंगे, जिसके बाद तस्वीर पूरी तरह से साफ हो जाएगी कि आने वाले महीनों में देश की बैंकिंग प्रणाली का रुख कैसा रहने वाला है। निवेशकों, शेयर बाजार के विश्लेषकों और आम नागरिकों की सांसें इस वक्त अटकी हुई हैं क्योंकि एक छोटा सा फैसला लाखों लोगों की वित्तीय सेहत को सीधे तौर पर प्रभावित करने की ताकत रखता है। बहरहाल, जो लोग लोन लेने की सोच रहे थे या जिनकी ईएमआई पहले से चल रही है, उन्हें अब अपनी कमर कसने के लिए तैयार रहना होगा क्योंकि वित्तीय अनुशासन और बजट प्रबंधन का यह दौर हर किसी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है।