होर्मुज जलडमरूमध्य पर अनिश्चितता के चलते क्रूड ऑयल में उछाल, तेल कंपनियों ने जारी किए पेट्रोल-डीजल के नए रेट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर तेजी दर्ज की गई है। पश्चिम एशिया के बेहद संवेदनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा पूरी तरह से खोलने को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण ग्लोबल मार्केट में उथल-पुथल देखने को मिल रही है। इस भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई को लेकर खड़े हुए नए सवालों का असर सीधे तौर पर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जिससे निवेशकों और ऊर्जा बाजारों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
क्यों चढ़े क्रूड ऑयल के दाम?
वैश्विक बाजार में बेंचमार्क समझे जाने वाले ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के दाम में 1% से ज्यादा की तेजी आई है और यह उछलकर लगभग 84.46 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी बढ़त के साथ 78 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है। जानकारों के मुताबिक, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए रखी गई कुछ नई शर्तों और अमेरिका के साथ चल रहे गतिरोध के चलते बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। दुनिया का एक बड़ा तेल का हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक आपूर्ति पर पड़ता है।
देश के महानगरों में पेट्रोल और डीजल के ताजा भाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने देश भर के लिए पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि देश के प्रमुख महानगरों में ईंधन की खुदरा कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं:
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नई दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर
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मुंबई: पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थानीय टैक्स के हिसाब से स्थिर
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कोलकाता और चेन्नई: महानगरों में भी उपभोक्ताओं को तयशुदा कीमतों पर ही ईंधन मिल रहा है
आम जनता पर क्या होगा इसका असर?
भारत अपनी कुल जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में मिड-ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी तनाव और होर्मुज के रास्ते पर बनी असमंजस की स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊपर-नीचे होती रहीं, तो आने वाले दिनों में घरेलू स्तर पर तेल कंपनियों के लिए कीमतों को नियंत्रित रखना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। हालांकि, देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां रोजाना सुबह 6 बजे अंतरराष्ट्रीय कीमतों की समीक्षा के बाद ही नए रेट तय करती हैं।