कल से शुरू होने वाला हफ्ता बाजार के लिए होगा खास, इन फैक्टर पर निर्भर करेगी बाजार की चाल

कल से शुरू होने वाला हफ्ता बाजार के लिए होगा खास, इन फैक्टर पर निर्भर करेगी बाजार की चाल

भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए कल सोमवार से शुरू होने वाला नया कारोबारी हफ्ता बेहद रोमांचक, व्यस्त और महत्वपूर्ण रहने की पूरी उम्मीद है। पिछले कुछ हफ्तों से बाजार में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल उथल-पुथल का दौर जारी है, जिसके बाद अब निवेशकों की निगाहें पूरी तरह से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घटने वाली बड़ी घटनाओं पर टिकी हैं। इस हफ्ते बाजार की दिशा तय करने में कई बड़े ट्रिगर एक साथ काम करने वाले हैं, जिनमें देश के सबसे बड़े आईपीओ से लेकर कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक कमोडिटी बाजार के रुख शामिल हैं। ऐसे में दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) पर काम करने वाले निवेशकों को हर एक कदम बहुत ही सावधानी और सूझबूझ के साथ उठाने की जरूरत होगी, क्योंकि यह हफ्ता बाजार की आगामीmedium-term ट्रेंड की तस्वीर साफ कर सकता है।

रिलायंस जियो का मेगा आईपीओ और प्राइमरी मार्केट में हलचल

आने वाले हफ्ते का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला केंद्र बिंदु देश के इतिहास का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर यानी रिलायंस इंडस्ट्रीज समर्थित जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का आईपीओ (Jio Platforms IPO) रहने वाला है। प्राइमरी मार्केट में भूचाल लाने वाला यह बहुप्रतीक्षित आईपीओ निवेशकों के लिए सब्सक्रिप्शन हेतु खुलने जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस मेगा आईपीओ में बड़े पैमाने पर खुदरा (Retail) और संस्थागत निवेशकों की पूंजी लग सकती है, जिसके कारण सेकेंडरी मार्केट (शेयर बाजार) की तरलता (Liquidity) पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। निवेशकों का एक बड़ा वर्ग अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने के लिए इस इश्यू पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।

कंपनियों के दूसरी तिमाही (Q2) के वित्तीय नतीजे तय करेंगे शेयरों की दिशा

इस हफ्ते शेयर बाजार की चाल पूरी तरह से कॉरपोरेट अर्निंग्स यानी कंपनियों के वित्तीय परिणामों पर भी निर्भर करेगी। बाजार में अब दूसरी तिमाही (Q2 FY27) के नतीजे अपने पूरे चरम पर पहुंच चुके हैं। इस हफ्ते देश की कई दिग्गज और दिग्गज कंपनियों के अलावा प्रमुख बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, आईटी और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियां अपने तिमाही मुनाफे और बिजनेस ग्रोथ के आंकड़े पेश करेंगी। निवेशकों और म्यूचुअल फंड मैनेजर्स की नजर इस बात पर होगी कि क्या कंपनियों के नतीजे उम्मीद के मुताबिक मजबूत हैं या महंगाई और बढ़ती लागत का असर उनके मार्जिन पर पड़ा है। जिन कंपनियों के नतीजे शानदार आएंगे, उनके शेयरों में जबरदस्त एक्शन देखने को मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का घरेलू बाजार पर असर

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार बनी अस्थिरता और उतार-चढ़ाव भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए हमेशा से एक बड़ा चिंता का विषय रहे हैं। मिडिल ईस्ट के हालात और ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रहे बदलावों के कारण क्रूड ऑयल के दाम ऊपर-नीचे हो रहे हैं, जिसका सीधा असर भारत के आयात बिल, रुपए की चाल और महंगाई पर पड़ता है। इसके साथ ही अमेरिकी बॉंड यील्ड (US Bond Yields) और ग्लोबल इक्विटी बाजारों के संकेतों से भी यह तय होगा कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार में बिकवाली का सिलसिला रोकते हैं या अपनी लिwali बढ़ाते हैं।

घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की खरीदारी और तकनीकी स्तरों पर निवेशकों की सलाह

पिछले कुछ समय से विदेशी निवेशकों द्वारा की जा रही बिकवाली के बावजूद हमारे देश के घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और म्यूचुअल फंड्स ने जिस प्रकार बाजार को मजबूत सहारा दिया है, उसने खुदरा निवेशकों का भरोसा बनाए रखा है। तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी और सेंसेक्स इस समय एक अहम दौर से गुजर रहे हैं, जहां प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस जोन बाजार की अगली छलांग तय करेंगे। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस वोलेटाइल हफ्ते में निवेशकों को आंख मूंदकर ट्रेड करने के बजाय केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों और क्वालिटी स्टॉक्स में ही एसआईपी या चुनिंदा रणनीति के तहत निवेश करना चाहिए, ताकि किसी भी अचानक आने वाले बड़े झटके से बचा जा सके।