Corruption: यूपी में भ्रष्ट अफसरों की खैर नहीं, डेढ़ सौ से ज्यादा नौकरशाह योगी सरकार के रडार पर

सीएम योगी ने गत नवंबर माह में चारागाह की जमीन निजी बिल्डर को सौंपने वाले एसडीएम के खिलाफ कड़ा ऐक्शन लेते हुए भ्रष्टाचार (Corruption)  के आरोपी और मेरठ जिले की सरधना तहसील में एसडीएम रहे भूपेंद्र सिंह को डिमोट कर तहसीलदार बनाने का आदेश दिया था।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भ्रष्ट नौकरशाह/अफसरों की खैर नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सूबे में भ्रष्टाचार (Corruption) के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं। योगी के लगभग चार साल के कार्यकाल में दर्जनों भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो चुकी है। कई भ्रष्ट अफसरों को निलंबन और बर्खास्तगी झेलनी पड़ी। अभी भी कई भ्रष्ट अफसर सरकार के रडार पर हैं।

Corruption - Cm Yogi

उल्लेखनीय है कि भ्रष्टाचार (Corruption)  के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत योगी सरकार अपने लगभग चार वर्ष के शासन काल में भ्रष्टाचार में लिप्त मिले 325 अफसर व कर्मियों को जबरन वीआरएस दे चुकी है। इसी तरह चार सौ से ज्यादा अफसरों और कर्मचारियों का प्रमोशन रोक दिया गया है। यूपी देश का पहला सूबा है, जिसने इस तरह की सख्त कार्रवाई की है। इसके अलावा तमाम भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ निलम्बन और डिमोशन की कार्रवाई की गई है।

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इसी क्रम में गत सितंबर माह में सीएम योगी ने शिकायतों की जाँच के बाद दो आईपीएस अधिकारियों प्रयागराज में एसएसपी अभिषेक दीक्षित और महोबा के एसपी मणिलाल पाटीदार को निलंबित कर दिया। दोनों आईपीएस अधिकारियों की संपत्ति की विजिलेंस जांच के आदेश भी दिए गए। दोनों अधिकारियों पर जिलों में थानेदारों की तैनाती में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार (Corruption)  कर धन उगाही के आरोप हैं।

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सीएम योगी ने गत नवंबर माह में चारागाह की जमीन निजी बिल्डर को सौंपने वाले एसडीएम के खिलाफ कड़ा ऐक्शन लेते हुए भ्रष्टाचार (Corruption)  के आरोपी और मेरठ जिले की सरधना तहसील में एसडीएम रहे भूपेंद्र सिंह को डिमोट कर तहसीलदार बनाने का आदेश दिया था। भूपेंद्र सिंह ने बतौर एसडीएम साल 2013 में मेरठ की सरधना तहसील के गांव शिवाया, जमाउल्लापुर के राजस्व अभिलेखों में चारागाह के तौर पर दर्ज 1.583 हेक्टेयर भूमि को निजी बिल्डर को आवंटित कर दी थी। इस मामले में दोषी एक अन्य एसडीएम, एक अपर आयुक्त, एक तहसीलदार, एक राजस्व निरीक्षक और एक लेखपाल के खिलाफ भी कार्रवाई चल रही है।

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इसी तरह कोरोना काल में सूबे के कई जिलों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने के नाम पर ऑक्सीमीटर और इंफ्रारेड थर्मामीटर की अनाप-शनाप कीमत पर खरीददारी में भ्रष्टाचार (Corruption)  की शिकायतें आते ही सीएम योगी ने जांच बैठा दी। इसी तरह योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के लिए खासतौर से बदनाम सूबे के विकास प्राधिकरणों में धांधली रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। जानकारी के मुताबिक़ विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद में होने वाले बड़े कामों की थर्ड पार्टी से जांच की तैयारी की जा रही है। इसी तरह भ्रष्टाचार को लेकर मीडिया में प्रसारित ख़बरें भी संज्ञान में लेकर योगी सरकार उनकी जाँच कराकर कार्रवाई भी करती रही है।

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शासन के सूत्रों के मुताबिक़ इस समय डेढ़ सौ से ज्यादा अफसर योगी सरकार के रडार पर हैं। इनमें ज्यादातर आईएएस और आईपीएस अफसर हैं। ऐसे अफसरों की सूची तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी गई है। भ्रष्ट (Corruption)  अफसरों के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्प लाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायत सतर्कता विभाग के हेल्प लाइन नंबर 9454401866 तथा कंट्रोल रूम के नंबर 0522-2304937 पर दर्ज कराई जा सकती हैं।

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