Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मिडिल ईस्ट में पिछले 24 दिनों से जारी बारूद की बारिश अब थमने वाली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला और ऐतिहासिक दावा करते हुए युद्ध समाप्ति की आधिकारिक तिथि का संकेत दे दिया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा यह भीषण संघर्ष 9 अप्रैल, 2026 को औपचारिक रूप से समाप्त हो सकता है। इस घोषणा ने पूरी दुनिया को बड़ी राहत दी है, जो पिछले कई हफ्तों से तीसरे विश्व युद्ध के साये में जी रही थी।
"ईरान में अब कुछ भी तबाह करना बाकी नहीं"- ट्रंप की दहाड़
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में दावा किया है कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की सैन्य कमर तोड़ दी है। ट्रंप ने कहा, "हमने ईरान में वह सब कुछ खत्म कर दिया है जिसे खत्म किया जा सकता था। अब उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा, इसलिए वे समझौते की मेज पर आने को मजबूर हैं।" ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान का शीर्ष नेतृत्व बिखर चुका है और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई का कुछ पता नहीं है। हालांकि, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इन दावों को खारिज करते हुए ट्रंप को 'पाखंडी' करार दिया है।
इस्लामाबाद बनेगा शांति का केंद्र? जेडी वैंस कर सकते हैं अगुवाई
इस युद्ध को खत्म करने के लिए पाकिस्तान की भूमिका सबसे अहम बनकर उभरी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर लंबी बातचीत हुई है। इजरायली मीडिया और रॉयटर्स के सूत्रों का दावा है कि इस सप्ताह के अंत में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक उच्च स्तरीय शांति बैठक हो सकती है। चर्चा है कि इस बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व स्वयं उपराष्ट्रपति जेडी वैंस कर सकते हैं। तुर्की और मिस्र भी इस मध्यस्थता में पाकिस्तान का साथ दे रहे हैं।
15 मुद्दों पर बनी सहमति, तेल की कीमतों में आएगी भारी गिरावट
ट्रंप ने खुलासा किया है कि दोनों देश 15 महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दों पर समझौते के करीब पहुंच गए हैं। अगर यह समझौता 9 अप्रैल तक सिरे चढ़ जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी संजीवनी मिलेगी। ट्रंप ने ईरान को अपनी ऊर्जा सुविधाओं को बचाने के लिए 5 दिन का 'अल्टीमेटम' और मोहलत दी है, ताकि बातचीत को अंतिम रूप दिया जा सके।
भारत की पैनी नजर: एस. जयशंकर और मार्को रुबियो के बीच चर्चा
इस वैश्विक संकट के बीच भारत भी पूरी तरह सक्रिय है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर विस्तृत चर्चा की है। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत की मुख्य चिंता पश्चिम एशिया में स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा (कच्चे तेल और गैस की सप्लाई) को लेकर है। भारत इस शांति प्रक्रिया का स्वागत कर रहा है क्योंकि युद्ध खिंचने की स्थिति में भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका बुरा असर पड़ना तय था।




