नेपाल की भीषण तबाही ने ताजा की प्रोतिमा बेदी की दर्दनाक कहानी, बेटी ने खोला बड़ा राज
प्रकृति का तांडव जब भी अपना विकराल रूप दिखाता है, तो वह इंसानी दिलों में सदियों पुराने जख्मों को दोबारा हरा कर देता है। हाल ही में नेपाल से सामने आई प्राकृतिक आपदा और तबाही की दर्दनाक तस्वीरों ने देश भर के लोगों को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक तबाही को देखकर हर किसी के जेहन में उन तमाम त्रासदियों की यादें ताजा हो रही हैं जिन्होंने अतीत में कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया था। नेपाल की इस ताजा त्रासदी ने भारतीय सिनेमा और शास्त्रीय नृत्य जगत की जानी-मानी दिग्गज हस्ती प्रोतिमा बेदी (Protima Bedi) की उस दिल दहला देने वाली दर्दनाक कहानी को एक बार फिर से सुर्खियों में ला खड़ा कर दिया है। आज से ठीक 28 साल पहले पवित्र कैलाश मानसरोवर की यात्रा के दौरान प्रकृति के इसी कोप ने प्रोतिमा बेदी को हमेशा के लिए हमसे छीन लिया था। अब हाल ही में उनकी बेटी ने इस पूरी दुर्घटना से जुड़े कुछ ऐसे बड़े और अनसुने राज खोले हैं, जिन्हें जानकर किसी की भी आंखें नम हो जाएंगी। आइए इस विस्तृत और गहराई से रची गई रिपोर्ट में जानते हैं कि उस मनहूस यात्रा के दौरान आखिर क्या हुआ था और बेटी द्वारा खोले गए राज में कौन से नए खुलासे सामने आए हैं।
कौन थीं प्रोतिमा बेदी और उनका कला के प्रति समर्पण
प्रोतिमा बेदी सिर्फ एक नाम नहीं था, बल्कि वह भारतीय शास्त्रीय नृत्य विशेषकर ओडिसी नृत्य के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी और बेहद प्रतिष्ठित हस्ताक्षर थीं। उनका जीवन किसी खुली किताब की तरह था, जो बेबाकी, कला के प्रति अटूट समर्पण और अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने के लिए जाना जाता था। उन्होंने न सिर्फ देश के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय संस्कृति और नृत्य कला का मान बढ़ाया था। बेंगलुरु के पास ‘नृत्यग्राम’ की स्थापना करके उन्होंने पारंपरिक कला को जीवित रखने और आने वाली पीढ़ी को प्रशिक्षित करने का जो बीड़ा उठाया था, वह आज भी उनके विजन की गवाही देता है। अपनी ऊर्जावान शख्सियत और बेखौफ अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली प्रोतिमा बेदी जब अचानक अपने करियर के शिखर के पास आध्यात्मिक और आंतरिक शांति की तलाश में कैलाश मानसरोवर की कठिन यात्रा पर निकलीं, तो किसी को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह उनकी जिंदगी की आखिरी यात्रा साबित होगी।
28 साल पहले कैलाश मानसरोवर यात्रा का वह खौफनाक हादसा
आज से लगभग 28 साल पहले जब प्रोतिमा बेदी ने कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा पर जाने का फैसला किया, तो उनके करीबी और चाहने वाले थोड़े चिंतित जरूर हुए क्योंकि यह मार्ग अपनी भौगोलिक कठिनाइयों के लिए कुख्यात है। लेकिन प्रोतिमा अपनी जिजीविषा और साहसिक प्रवृत्ति के चलते इस चुनौती को स्वीकार कर चुकी थीं। यात्रा के दौरान ही प्रकृति ने अपना ऐसा भयंकर रूप दिखाया कि तीर्थयात्रियों का यह जत्था बर्फीले तूफान और आपदा की चपेट में आ गया। भारी भूस्खलन और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते हालात इतने बिगड़ गए कि कई लोग लापता हो गए। लंबी खोजबीन और बचाव अभियानों के बाद जब सच्चाई सामने आई, तो पता चला कि प्रोतिमा बेदी उस भीषण प्राकृतिक आपदा का शिकार हो चुकी थीं। उनके निधन की खबर ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया था, क्योंकि एक जीवंत और ऊर्जा से भरपूर कलाकार का इस तरह अचानक दुनिया से चले जाना कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति था।
बेटी पूजा बेदी ने खोले कई बड़े और चौंकाने वाले राज
हाल ही में नेपाल की ताजा तबाही और प्राकृतिक आपदाओं के दौर के बीच, प्रोतिमा बेदी की प्रसिद्ध अभिनेत्री बेटी पूजा बेदी ने अपनी मां की उस अंतिम यात्रा से जुड़े कई गहरे और अनसुने राज दुनिया के सामने रखे हैं। एक इंटरव्यू और सार्वजनिक मंच पर बातचीत के दौरान पूजा बेदी ने बताया कि उनकी मां की मृत्यु केवल एक साधारण दुर्घटना नहीं थी, बल्कि उस यात्रा के दौरान प्रशासनिक और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी भी इसका एक बड़ा कारण बनी थी। पूजा ने साझा किया कि जब उनकी मां यात्रा पर गई थीं, तब कम्यूनिकेशन के साधन आज की तरह उन्नत नहीं थे और संकट के समय मदद पहुंचने में काफी देरी हुई थी। इसके अलावा, बेटी ने यह भी खुलासा किया कि प्रोतिमा को पहले से ही इस बात का एक अजीब सा आभास हो चुका था कि यह उनकी आखिरी यात्रा हो सकती है, फिर भी उन्होंने अपने आध्यात्मिक जुड़ाव के कारण पीछे हटने से इंकार कर दिया था। इन खुलासों ने एक बार फिर उस 28 साल पुराने हादसे की हर एक परत को दोबारा जीवंत कर दिया है।
नेपाल की मौजूदा तबाही और अतीत की दर्दनाक यादों का मेल
जब भी हिमालयी क्षेत्रों या नेपाल की वादियों से किसी प्राकृतिक आपदा की खबर आती है, तो कैलाश मानसरोवर, केदारनाथ या अन्य धार्मिक और पर्वतीय यात्राओं के वे तमाम पुराने हादसे अपने आप लोगों की आंखों के सामने तैरने लगते हैं। प्रकृति और इंसान के बीच की इस जंग में हर बार कमजोर इंसान ही कुदरत के आगे बेबस नजर आता है। नेपाल की आज की इस तबाही ने न केवल वर्तमान में भारी जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि प्रोतिमा बेदी जैसे उन तमाम असाधारण व्यक्तित्वों के अधूरे सपनों और उनकी दर्दनाक विदाई की यादों को भी ताजा कर दिया है। इतिहास गवाह है कि पहाड़ों की गोद में छिपे ये रास्ते जितने खूबसूरत होते हैं, कई बार उतने ही खतरनाक और अनिश्चित भी साबित होते हैं। आज जब लोग प्रोतिमा बेदी के उस दौर को याद करते हैं, तो उनकी आंखें नम हो जाती हैं और साथ ही कला के प्रति उनका वह जुनून हमेशा के लिए अमर हो जाता है।