अंधविश्वास और साइंस के बीच फंसे प्रोफेसर, फुल ऑन एंटरटेनर में लगा कॉमेडी का परफेक्ट तड़का

अंधविश्वास और साइंस के बीच फंसे प्रोफेसर, फुल ऑन एंटरटेनर में लगा कॉमेडी का परफेक्ट तड़का

सिनेमाघरों में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए एक बेहद अनोखी और गुदगुदाने वाली फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' रिलीज हो चुकी है। अगर आप इस वीकेंड अपने पूरे परिवार के साथ एक ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो आपको हंसाने के साथ-साथ एक बेहतरीन सीख भी दे, तो यह फिल्म आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट चॉइस है। अंधविश्वास की गहरी रूढ़ियों और आधुनिक साइंस के तर्कों के बीच फंसे एक कॉलेज प्रोफेसर की यह कहानी दर्शकों को शुरू से लेकर अंत तक हंसने पर मजबूर कर देती है। फिल्म में कॉमेडी के साथ-साथ जो सस्पेंस और ड्रामा बुना गया है, उसने इसे इस साल की सबसे बड़ी फुल ऑन एंटरटेनर फिल्म बना दिया है।

अंधविश्वास बनाम विज्ञान की मजेदार जंग, प्रोफेसर की जिंदगी में आया भूचाल

फिल्म की कहानी एक ऐसे प्रोफेसर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो हर बात के पीछे सिर्फ और सिर्फ विज्ञान (Science) और लॉजिक ढूंढता है। लेकिन उसकी जिंदगी में ट्विस्ट तब आता है, जब उसका सामना एक ऐसे कट्टर और पारंपरिक परिवार से होता है जो पूरी तरह से अंधविश्वास, कुंडली और टोटकों पर भरोसा करता है। प्रोफेसर जब इस जाल में फंसता है, तो वहां से पैदा होने वाली सिचुएशनल कॉमेडी फिल्म की सबसे बड़ी जान है। डायरेक्टर ने बेहद संवेदनशील विषय 'अंधविश्वास' को बिना किसी को ठेस पहुंचाए, बेहद हल्के-फुल्के और मजाकिया अंदाज में पर्दे पर उतारा है, जो दर्शकों के दिलों को सीधे छू जाता है।

कॉमेडी का लगा जबरदस्त तड़का, वन-लाइनर्स और पंचलाइंस ने जीता दिल

'उत्तर दा पुत्तर' की यूएसपी (USP) इसकी जबरदस्त स्टारकास्ट और उनके बीच की कॉमिक टाइमिंग है। फिल्म के मुख्य कलाकारों ने अपने किरदारों को इतनी जीवंतता से निभाया है कि उनके हर एक एक्सप्रेशन पर थिएटर में तालियां और ठहाके गूंज उठते हैं। विशेषकर सह-कलाकारों के देसी लहजे और वन-लाइनर्स इतने सटीक हैं कि वे लंबे समय तक आपके दिमाग में रजिस्टर रहेंगे। फिल्म का फर्स्ट हाफ जहां किरदारों को स्थापित करने और कॉमेडी का माहौल बनाने में निकलता है, वहीं सेकंड हाफ में कहानी थोड़ी रफ्तार पकड़ती है और सस्पेंस के साथ एक बेहद खूबसूरत सोशल मैसेज देकर खत्म होती है।

स्क्रीनप्ले और म्यूजिक ने बांधा समां, वीकेंड पर फैमिली के साथ देखने लायक फिल्म

टेक्निकल फ्रंट पर बात करें तो फिल्म का स्क्रीनप्ले काफी क्रिस्प है, जो कहीं भी आपको बोरियत का अहसास नहीं होने देता। फिल्म के गाने कहानी के साथ बिल्कुल फिट बैठते हैं और बैकग्राउंड स्कोर कॉमिक सीन्स के प्रभाव को दोगुना कर देता है। हालांकि, फिल्म के कुछ दृश्यों में थोड़ा मेलोड्रामा ज्यादा लगता है, लेकिन दमदार एक्टिंग और बेहतरीन डायरेक्शन के सामने यह छोटी कमियां छिप जाती हैं। कुल मिलाकर, यह फिल्म हर उम्र के दर्शकों के लिए एक क्लीन और प्योर एंटरटेनमेंट पैकेज है, जिसे सिनेमाघरों में बड़े पर्दे पर ही एक्सपीरियंस किया जाना चाहिए।

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