'रामायण' से पहले साई पल्लवी ने ठुकराई 5 फिल्में, 1 ने बॉक्स ऑफिस पर काटा गदर, दूसरी में थलापति संग बनते रह गई जोड़ी
भारतीय सिनेमा जगत में अपनी बेहतरीन अदायगी, प्राकृतिक खूबसूरती और सादगी भरे अंदाज के लिए करोड़ों दिलों पर राज करने वाली लोकप्रिय अभिनेत्री साई पल्लवी इन दिनों अपनी बहुप्रतीक्षित और मेगा-बजट पौराणिक फिल्म 'रामायण' को लेकर सबसे ज्यादा सुर्खियों में बनी हुई हैं। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में वह माता सीता के ऐतिहासिक किरदार में नजर आने वाली हैं, जिसके लिए उन्हें फैंस की तरफ से बेशुमार प्यार मिल रहा है। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचना और 'रामायण' जैसी भव्य फिल्म का हिस्सा बनना साई पल्लवी के लिए इतना आसान नहीं रहा है। इंडस्ट्री के गलियारों में इन दिनों एक बहुत बड़ी और दिलचस्प चर्चा तेजी से तैर रही है कि निर्देशक की कुर्सी संभालने से पहले और 'रामायण' को हां कहने से पहले साई पल्लवी ने साउथ सिनेमा की कई दिग्गज फिल्मों के प्रस्तावों को सीधे तौर पर ठुकरा दिया था। इन पांच फिल्मों में से एक फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए गदर मचा दिया था, तो वहीं दूसरी फिल्म में उनकी जोड़ी साउथ के मेगास्टार थलापति विजय के साथ बनते-बनते रह गई थी।
अपनी शर्तों पर काम करने वाली अभिनेत्री हैं साई पल्लवी
साई पल्लवी उन गिनी-चुनी अभिनेत्रियों में से एक हैं जो अपनी शर्तों, मजबूत नैतिक मूल्यों और स्क्रिप्ट की गुणवत्ता के आधार पर ही फिल्मों का चुनाव करती हैं। उन्हें ग्लैमर या कमर्शियल मसालों से भरी फिल्मों की तुलना में एक मजबूत कहानी और अपने किरदार की गहराई ज्यादा आकर्षित करती है। यही वजह है कि जब उनके पास बड़े-बड़े बैनर्स और दिग्गज निर्देशकों के प्रोजेक्ट्स लाइन लगाकर आते हैं, तब भी वह बिना किसी हिचकिचाहट के उन फिल्मों को ना कहने का साहस रखती हैं जो उनके मानदंडों पर खरी नहीं उतरतीं। 'रामायण' जैसी फिल्म को साइन करने से पहले उन्होंने जिन पांच बड़ी फिल्मों को रिजेक्ट किया था, उनमें से कई ऐसी थीं जो बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुईं। हालांकि, साई पल्लवी को अपने इन फैसलों पर कभी कोई पछतावा नहीं रहा क्योंकि वह जानती हैं कि उनकी यह बेबाकी और पारदर्शिता ही उन्हें बाकी अभिनेत्रियों से अलग और खास बनाती है।
जब हाथ से निकल गई थलापति विजय के साथ काम करने की बड़ी सुनहरी मौका
साई पल्लवी द्वारा ठुकराई गई उन पांच फिल्मों में सबसे ज्यादा चर्चा उस प्रोजेक्ट की होती है जिसमें उनकी जोड़ी तमिल सिनेमा के हाईएस्ट पेड स्टार थलापति विजय के साथ तय मानी जा रही थी। निर्देशक लोकेश कनकराज की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'लियो' या उससे जुड़े अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स के शुरुआती दौर में मेकर्स की पहली पसंद साई पल्लवी ही थीं। दर्शकों का एक बहुत बड़ा वर्ग पर्दे पर थलापति विजय और साई पल्लवी की केमिस्ट्री देखने के लिए बेताब था, क्योंकि दोनों की अभिनय शैली बिल्कुल अलग और दमदार है। लेकिन कुछ रचनात्मक असहमतियों, डेट्स की समस्याओं या फिर किरदार की लंबाई को लेकर बात न बन पाने के कारण साई पल्लवी ने इस प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट से पीछे हटने का फैसला कर लिया। उनके इस फैसले से उनके फैंस को जरूर थोड़ी मायूसियत हुई थी, क्योंकि थलापति विजय के साथ उनकी जोड़ी बनते-बनते रह गई थी, जो कॉलीवुड की सबसे बड़ी ऑन-स्क्रीन जोड़ियों में से एक साबित हो सकती थी।
बॉक्स ऑफिस पर गदर मचाने वाली वह ब्लॉकबस्टर फिल्म जिसे अभिनेत्री ने कह दिया था सीधा ना
कहा जाता है कि सफलता उसी के कदम चूमती है जो अपने फैसलों पर अडिग रहता है। साई पल्लवी के करियर में कई ऐसे मौके आए जब उन्होंने किसी बड़े निर्देशक की फिल्म को इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि उन्हें लगा कि उस कहानी में उनके करने के लिए कुछ खास नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि जिन फिल्मों को उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं के चलते रिजेक्ट किया, उनमें से एक फिल्म ने रिलीज के बाद सिनेमाघरों में ऐसा गदर काटा कि ट्रेड एनालिस्ट्स भी हैरान रह गए। उस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई करते हुए कई नए रिकॉर्ड स्थापित किए। इसके बावजूद साई पल्लवी ने कभी इस बात का मलाल नहीं किया कि उन्होंने उस फिल्म को क्यों छोड़ा। उनका साफ मानना है कि वह केवल ऐसे किरदारों को चुनना पसंद करती हैं जो दर्शकों के दिलों पर एक गहरी छाप छोड़ सकें और समाज या कहानी में उनका एक सार्थक योगदान हो सके।
'रामायण' में माता सीता के रूप में इतिहास रचने के लिए पूरी तरह तैयार हैं साई पल्लवी
इन तमाम उतार-चढ़ाव, फिल्मों के ठुकराए जाने और अपने सिद्धांतों पर डटे रहने के सफर के बाद आखिरकार साई पल्लवी को वह ऐतिहासिक प्रोजेक्ट मिल ही गया जिसकी तलाश हर कलाकार को होती है। रणबीर कपूर के साथ फिल्म 'रामायण' में माता सीता की भूमिका निभाना उनके फिल्मी करियर का सबसे बड़ा और स्वर्णिम अध्याय साबित होने जा रहा है। उनकी सादगी, शालीनता और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव इस किरदार के लिए उन्हें दुनिया भर में सबसे सटीक और परफेक्ट विकल्प बनाता है। निर्देशक नितेश तिवारी भी इस बात को कई बार कह चुके हैं कि सीता के किरदार में जितनी दिव्यता और पवित्रता की आवश्यकता थी, वह सब उन्हें साई पल्लवी के अंदर सहज रूप से मिल गई है। भले ही उन्होंने अतीत में कई बड़े प्रोजेक्ट्स को अलविदा कह दिया हो, लेकिन 'रामायण' जैसी महागाथा का हिस्सा बनकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि उनका हर फैसला सोच-समझकर और बहुत दूर की सोच के साथ लिया जाता है।
फैंस के बीच बढ़ी उत्सुकता, भविष्य के प्रोजेक्ट्स पर टिकी हैं निगाहें
साई पल्लवी के इस अद्भुत चयन और उनके काम करने के अनोखे अंदाज ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए केवल भेड़चाल का हिस्सा बनना जरूरी नहीं है, बल्कि अपनी काबिलियत पर भरोसा होना सबसे बड़ी ताकत है। उनके फैंस अब बड़ी बेसब्री से 'रामायण' की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे पर्दे पर अपनी पसंदीदा अभिनेत्री को इस भव्य रूप में देख सकें। भले ही अतीत में थलापति विजय के साथ उनकी जोड़ी न बन पाई हो और उन्होंने कई नामी फिल्मों को ठुकरा दिया हो, लेकिन आज उनका यह जिद्दी और स्वतंत्र स्वभाव ही उन्हें भारतीय सिनेमा की सबसे सम्मानित अभिनेत्रियों की सूची में सबसे ऊपर खड़ा करता है। आने वाले समय में उनकी यह प्रतिबद्धता और अभिनय के प्रति समर्पण उन्हें और भी ऊंचे शिखरों पर ले जाने वाला है, और दर्शक उनकी हर नई अदा पर फिदा होने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।