सनी देओल की फिल्म 'सूर्या' पर मेडिकल पेशे को बदनाम करने का आरोप, IMA ने सरकार से लगाई गुहार- 'सुरक्षा को खतरा'

सनी देओल की फिल्म 'सूर्या' पर मेडिकल पेशे को बदनाम करने का आरोप, IMA ने सरकार से लगाई गुहार- 'सुरक्षा को खतरा'

बॉलीवुड के दिग्गज और एक्शन किंग सनी देओल की आने वाली बहुचर्चित फिल्म 'सूर्या - अंत से आरंभ तक' रिलीज से पहले ही बड़े विवादों के घेरे में आ गई है। हाल ही में अभिनेता के जन्मदिन के खास मौके पर मेकर्स ने इस फिल्म का टीजर रिलीज किया था, जिसे दर्शकों की तरफ से तो जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, लेकिन यह देश के सबसे बड़े मेडिकल संगठन की नजरों में खटक गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी IMA ने फिल्म के कंटेंट और उसमें स्वास्थ्य पेशेवरों के चित्रण को लेकर गहरी आपत्ति जताई है। संगठन ने देश के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक औपचारिक पत्र लिखकर फिल्म की तत्काल और निष्पक्ष समीक्षा करने की मांग की है। IMA का साफ तौर पर कहना है कि फिल्म में डॉक्टरों और मेडिकल सिस्टम को जिस तरह से दिखाया गया है, उससे पूरे पेशे की छवि धूमिल हो रही है और इससे डॉक्टरों की सुरक्षा को भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

टीजर सामने आने के बाद क्यों भड़का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन

विवाद की शुरुआत तब हुई जब निर्माताओं ने 'सूर्या' का टीजर सार्वजनिक किया। इस टीजर में सनी देओल एक ऐसे शख्स के रूप में नजर आ रहे हैं जो अपने जीवन की एक बड़ी व्यक्तिगत क्षति के बाद मेडिकल सिस्टम में फैली कथित धांधली, भ्रष्टाचार और खामियों की तह तक जाने की कोशिश करता है। इस टीजर के कुछ दृश्यों में मेडिकल स्टाफ और डॉक्टरों के खिलाफ कथित तौर पर हिंसा या गलत बर्ताव को दिखाया गया है, जिस पर IMA का गुस्सा फूट पड़ा है। एसोसिएशन का तर्क है कि इस तरह के दृश्यों को परदे पर दिखाना और उन्हें एक 'हीरो' के जरिए महिमामंडित करना समाज में गलत संदेश देता है। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि आज के समय में अस्पतालों और क्लीनिकों के भीतर स्वास्थ्यकर्मियों पर पहले से ही हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं, ऐसे में इस तरह का कंटेंट हिंसा को और अधिक बढ़ावा दे सकता है।

व्यक्तिगत गलतियों की सजा पूरे चिकित्सा जगत को क्यों

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अपने पत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि वे किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या व्यक्तिगत स्तर पर होने वाली गलत हरकतों का समर्थन बिल्कुल नहीं करते हैं। यदि कहीं कोई कमी है या कोई डॉक्टर दोषी पाया जाता है, तो कानून के तहत उसकी जांच होनी चाहिए और सख्त कार्रवाई भी की जानी चाहिए। लेकिन इसके बावजूद चंद लोगों की गलतियों की वजह से पूरे मेडिकल समुदाय को भ्रष्ट या नकारात्मक रूप में पेश करना पूरी तरह से अनुचित है। देश को आगे बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए समर्पित डॉक्टरों की जरूरत है। इस तरह की फिल्मों से न केवल देश भर के मेडिकल छात्रों का मनोबल गिरता है, बल्कि युवा पीढ़ी के मन में इस महान पेशे के प्रति गलत धारणा भी बैठ जाती है।

डॉक्टर और मरीज के पवित्र रिश्ते पर पड़ेगा बुरा असर

चिकित्सा जगत और मरीजों का रिश्ता हमेशा से विश्वास, सेवा और करुणा की नींव पर टिका होता है। IMA का मानना है कि यदि फिल्मों के माध्यम से इस पेशे को लगातार संदेह की नजर से दिखाया जाएगा, तो आम जनता और डॉक्टरों के बीच का पवित्र भरोसा धीरे-धीरे टूटने लगेगा। जब मरीजों के मन में डॉक्टरों के प्रति बेवजह का डर और दुश्मनी की भावना पैदा होगी, तो इससे कुल मिलाकर पूरी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली प्रभावित होगी। संगठन ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि मनोरंजन के नाम पर किसी संवेदनशील पेशे की गरिमा को ठेस पहुंचाना किसी भी स्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता है। एक तरफ जहां डॉक्टर दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की जिंदगियां बचाते हैं, वहीं इस प्रकार के चित्रण से उनके काम करने का माहौल और अधिक चुनौतीपूर्ण बन जाता है।

सरकार से की गई सख्त कार्रवाई और समीक्षा की मांग

इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार और फिल्म निर्माताओं के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। IMA ने सरकार से यह पुरजोर मांग की है कि रिलीज से पहले फिल्म के हर उस सीन की बारीकी से समीक्षा की जाए, जो चिकित्सा पेशे को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इसके साथ ही संगठन ने यह भी अपील की है कि यदि कानून के दायरे में जरूरी लगे, तो मेकर्स को इन दृश्यों में बदलाव करने के निर्देश दिए जाएं या फिर फिल्म पर उचित कानूनी कदम उठाए जाने पर विचार किया जाए। आने वाले दिनों में यह विवाद बॉलीवुड और मेडिकल बिरादरी के बीच एक बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि फिल्म 'सूर्या' आगामी 20 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए पूरी तरह से तैयार है। देखना यह होगा कि फिल्म के निर्माता इस पर क्या सफाई देते हैं या फिर विवादों से बचने के लिए क्या कदम उठाते हैं।