दिल्ली का प्रदूषण न कर दे आंखें खराब, घर से बाहर निकलने से पहले कर लें ये 5 काम
देश की राजधानी दिल्ली में हर साल सर्दियों के मौसम की शुरुआत के साथ ही हवा का हाल बद से बदतर हो जाता है। आसमान में चारों तरफ छाई धुंध और स्मॉग की घनी चादर न सिर्फ हमारे फेफड़ों और सांस की नलियों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि इसका सबसे बुरा प्रभाव हमारी आंखों पर पड़ता है। सुबह के वक्त जब लोग दफ्तर, स्कूल या कॉलेज के लिए घर से बाहर निकलते हैं, तो हवा में मौजूद खतरनाक पीएम 2.5 और पीएम 10 के सूक्ष्म कण सीधे आंखों के संपर्क में आते हैं। इसके चलते आंखों में जलन, भारीपन, लगातार पानी आना, खुजली और आंखें लाल होने जैसी गंभीर समस्याएं आम हो गई हैं। यदि आप भी दिल्ली की इस प्रदूषित आबोहवा में रोज सफर करते हैं और अपनी आंखों को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो घर से बाहर कदम रखने से पहले कुछ बेहद आसान लेकिन असरदार एहतियाती कदम जरूर उठा लें।
दिल्ली के खतरनाक प्रदूषण का आंखों पर पड़ता है सीधा और घातक असर
प्रदूषण के स्तर में लगातार होती वृद्धि के कारण हवा में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन के महीन कण तैरते रहते हैं। जब हम बिना किसी सुरक्षा के बाहर निकलते हैं, तो ये जहरीले रसायन और धूलकण आंखों की बाहरी सतह पर मौजूद टियर फिल्म के संपर्क में आकर उसे सुखा देते हैं। इसके कारण आंखों में ड्राइनेस यानी सूखापन बढ़ने लगता है और इंफेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक इस तरह के प्रदूषित वातावरण में रहने से कॉर्निया को नुकसान पहुंच सकता है और क्रॉनिक एलर्जी की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि हम समय रहते जागरूक हो जाएं और प्रदूषण के इस प्रकोप से अपनी आंखों की सुरक्षा के लिए पुख्ता उपाय करें।
घर से निकलने से पहले जरूर अपनाएं ये 5 आसान और असरदार उपाय
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क्वालिटी वाले प्रोटेक्टिव आईवियर या सनग्लासेस का करें इस्तेमाल: घर से बाहर निकलते समय अपनी आंखों को सीधे हवा और धूल के संपर्क में आने से बचाने के लिए एंटी-ग्लेयर या सादे सनग्लासेस पहनना सबसे कारगर उपाय है। यह चश्मा हवा में उड़ते हुए बड़े कणों और स्मॉग को आपकी आंखों तक पहुंचने से रोकता है।
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आई ड्रॉप्स या लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स का रखें इस्तेमाल: बाहर जाने से पहले डॉक्टर की सलाह से किसी अच्छे प्रिजर्वेटिव-फ्री लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप की एक-एक बूंद आंखों में डाल लें। यह आंखों की नमी को बनाए रखता है और प्रदूषण के कणों को सतह पर जमने नहीं देता है।
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आंखों को बार-बार छूने या रगड़ने से बचें: सफर के दौरान या रास्ते में गंदे हाथों से अपनी आंखों को बिल्कुल न छुएं। हाथों पर मौजूद धूल और बैक्टीरिया आंखों में जाकर कंजंक्टिवाइटिस या गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
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हाइड्रेशन का रखें विशेष ध्यान और खूब पानी पिएं: शरीर के भीतर से नमी कम होने पर आंखें भी जल्दी सूखती हैं। घर से निकलने से पहले और पूरे दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर और आंखें दोनों हाइड्रेटेड रहें।
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घर लौटने के बाद ठंडे पानी से आंखों को अच्छी तरह धोएं: जब आप वापस घर लौटें, तो तुरंत आंखों को रगड़ने के बजाय साफ और ठंडे पानी से छींटे मारकर अच्छी तरह धोएं ताकि दिनभर जमा हुई गंदगी और टॉक्सिंस बाहर निकल जाएं।
प्रदूषण के इस दौर में खानपान और जीवनशैली में कैसे करें जरूरी बदलाव
सिर्फ बाहरी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि अंदरूनी सेहत भी आंखों को प्रदूषण से बचाने में अहम भूमिका निभाती है। अपने दैनिक आहार में विटामिन ए, विटामिन सी, ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे गाजर, पालक, चुकंदर, संतरा, अखरोट और बादाम को शामिल करें। ये पोषक तत्व आंखों की कोशिकाओं को मजबूत बनाते हैं और प्रदूषण से होने वाले ऑक्सीडेटिव डैमेज को रोकते हैं। इसके अलावा पर्याप्त नींद लें क्योंकि थकी हुई आंखें प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। यदि आंखों में लगातार चुभन या दर्द बना रहे, तो बिना देर किए किसी नजदीकी नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें और डॉक्टर के परामर्श के बिना कोई भी दवा इस्तेमाल करने से बचें।