बिना दर्द के पेशाब में बदलाव से कैसे चल सकता है बीमारी का पता, एक्सपर्ट्स से समझें

बिना दर्द के पेशाब में बदलाव से कैसे चल सकता है बीमारी का पता, एक्सपर्ट्स से समझें

कैंसर एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिसका नाम सुनते ही किसी भी इंसान के रोंगटे खड़े हो जाते हैं, लेकिन जब बात ब्लैडर कैंसर यानी मूत्राशय के कैंसर (Bladder Cancer) की आती है, तो स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और ऑन्कोलॉजिस्ट्स (Cancer Specialists) का मानना है कि ब्लैडर कैंसर के शुरुआती लक्षण इतने सामान्य और दर्दरहित होते हैं कि अक्सर मरीज इन्हें मामूली इंफेक्शन या पथरी की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बीमारी में जब पेशाब के रंग या आदत में बदलाव आता है, तो व्यक्ति को किसी भी तरह का कोई शारीरिक दर्द महसूस नहीं होता। यही वजह है कि मरीज डॉक्टर के पास तब पहुंचते हैं जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। यदि आप भी अपनी सेहत को लेकर सतर्क रहते हैं, तो आपको ब्लैडर कैंसर के इन खामोश संकेतों, जोखिम कारकों और बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से जान लेना चाहिए ताकि समय रहते सही इलाज से जान बचाई जा सके।

बिना दर्द के पेशाब में खून आना (Painless Hematuria): ब्लैडर कैंसर का सबसे पहला और खतरनाक चेतावनी संकेत

डॉक्टरों के अनुसार, ब्लैडर कैंसर का सबसे प्रमुख और पहला शुरुआती लक्षण पेशाब में खून का दिखाई देना है, जिसे मेडिकल भाषा में 'पेनलेस हेमटुरिया' (Painless Hematuria) कहा जाता है। इसमें पेशाब का रंग हल्का गुलाबी, लाल या गहरा भूरा (चाय की पत्ती जैसा) दिखाई दे सकता है। सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि इस दौरान मरीज को पेशाब करते समय न तो कोई जलन होती है और ना ही पेट या पीठ में कोई दर्द महसूस होता है। कभी-कभी यह खून कुछ दिनों के लिए अपने आप आना बंद हो जाता है और फिर हफ्ते या महीने भर बाद दोबारा दिखाई देने लगता है। लोग अक्सर इसे पानी कम पीने या सामान्य यूटीआई (UTI) का लक्षण मान लेते हैं, जो कि एक बहुत बड़ी भूल साबित होती है। यदि आपको बिना किसी दर्द के पेशाब के रंग में कोई भी बदलाव दिखे, तो बिना एक दिन की देरी किए तुरंत यूरोलॉजिस्ट (Urologist) से संपर्क कर जांच करानी चाहिए।

पेशाब करने की आदतों में बार-बार बदलाव आना और अधूरा खाली होने का अहसास होना भी है बड़ा लक्षण

ब्लैडर कैंसर के अन्य लक्षणों की बात करें तो इसमें व्यक्ति को बार-बार पेशाब आने की हाजत महसूस होती है, भले ही मूत्राशय पूरी तरह से भरा न हो। कई बार पेशाब करने के दौरान अचानक तेज दबाव महसूस होता है और ऐसा लगता है कि पेशाब पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा, पेशाब की धार का कमजोर पड़ जाना, रुक-रुक कर पेशाब आना या पेशाब करने के बाद भी ऐसा महसूस होना कि मूत्राशय पूरी तरह से साफ नहीं हुआ है, इसके मुख्य लक्षण हैं। जब कैंसर की गांठ ब्लैडर की दीवारों में फैलने लगती है या मूत्राशय के रास्ते में रुकावट पैदा करती है, तब जाकर निचले पेट या पेल्विक हिस्से में हल्का-हल्का दर्द शुरू होता है। यदि इन लक्षणों के साथ भूख कम लगना और अचानक वजन घटने लगे, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि बीमारी गंभीर रूप ले रही है।

स्मोकिंग से लेकर केमिकल्स का एक्सपोजर: जानिए किन लोगों को रहता है ब्लैडर कैंसर होने का सबसे ज्यादा खतरा?

हेल्थ रिपोर्टों और मेडिकल रिसर्च के अनुसार, ब्लैडर कैंसर होने का सबसे मुख्य और बड़ा कारण धूम्रपान (Smoking) यानी बीड़ी, सिगरेट या तंबाकू का सेवन करना है। तंबाकू में मौजूद हानिकारक टॉक्सिन्स जब सांस के जरिए शरीर में जाते हैं, तो वे रक्तप्रवाह में मिलकर किडनी द्वारा फिल्टर होते हैं और पेशाब के जरिए मूत्राशय में जमा होते हैं। ये जहरीले रसायन लंबे समय तक ब्लैडर की आंतरिक परत (Lining) को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर कोशिकाओं का निर्माण शुरू हो जाता है। इसके अलावा, जो लोग टेक्सटाइल, लेदर, पेंट, रबर या डाई इंडस्ट्री में काम करते हैं और रोजाना हानिकारक केमिकल्स के संपर्क में आते हैं, उनमें भी इसका जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। बढ़ती उम्र (50 वर्ष से अधिक), पुरुषों में महिलाओं की तुलना में अधिक प्रसार, और पीने के पानी में भारी धातुओं की उपस्थिति भी इसके प्रमुख जोखिम कारक माने जाते हैं।

शुरुआती पहचान ही है सबसे बड़ा बचाव: जानिए कौन-कौन सी जांचें हैं जरूरी और कैसे करें बचाव

यदि किसी व्यक्ति में बिना दर्द के पेशाब में बदलाव के लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर सबसे पहले यूरीन रूटीन, यूरीन साइटोलॉजी (Urine Cytology) और अल्ट्रासाउंड (USG) कराने की सलाह देते हैं। यदि इसमें कोई असामान्यता पाई जाती है, तो 'सिस्टोस्कोपी' (Cystoscopy) नाम की एक आधुनिक जांच की जाती है, जिसमें एक पतली नली और कैमरे के जरिए ब्लैडर के अंदरूनी हिस्से को सीधे देखा जाता है और संदिग्ध हिस्से की बायोप्सी (Biopsy) ली जाती है। शुरुआती चरण में पता चल जाने पर सर्जरी या इम्यूनोथेरेपी के जरिए ब्लैडर कैंसर का शत-प्रतिशत सफल इलाज संभव है। इससे बचाव के लिए धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाएं, रोजाना 3 से 4 लीटर पर्याप्त पानी पीएं ताकि टॉक्सिन्स शरीर से बाहर निकलते रहें, और केमिकल फैक्ट्री में काम करते समय सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग जरूर करें।