सर्द मौसम में भाजपा और कांग्रेस ने कोलकाता से लेकर दिल्ली तक सियासी बाजार किया गर्म

आइए आपको बताते हैं 'दोनों पार्टियों को कितना नफा-नुकसान होगा या हम कहें किसकी ज्यादा झोली भरेगी' ? पहले हम बात करेंगे भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और हर दांव-पेच में माहिर हो चुके गृहमंत्री अमित शाह की ।

आज 19 दिसंबर दिन शनिवार है । इस सर्द मौसम के बीच आज से दो दिन भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने कोलकाता से लेकर राजधानी दिल्ली तक सियासी बाजार गर्म कर दिया है । आइए आपको बताते हैं ‘दोनों पार्टियों को कितना नफा-नुकसान होगा या हम कहें किसकी ज्यादा झोली भरेगी’ ? पहले हम बात करेंगे भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और हर दांव-पेच में माहिर हो चुके गृहमंत्री अमित शाह की ।

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बता दें कि शाह दो दिन के दौरे पर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुंच चुके हैं । इस बार अमित शाह जिस तैयारी के साथ बंगाल पहुंचे हैं वह बताता है कि इस बार वह कोई बड़ा धमाका करेंगे । गृहमंत्री के दौरे से पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कई विधायक भाजपा में आने के लिए उतावले दिख रहे हैं ।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ममता बनर्जी की पार्टी के कितने नेता भाजपा का दामन थामेंगे ? लेकिन उससे पहले तृणमूल कांग्रेस के विधायकों में भगदड़ मची हुई है । ‘आने वाले कुछ घंटों में साफ हो जाएगा कि अमित शाह ने इस बार बंगाल यात्रा में ममता को कितना सियासी घाटा पहुंचाया’ ।

यहां आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पश्चिम बंगाल में 5 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए एड़ीचोटी का जोर लगाए हुए हैं । इसी को ध्यान में रखते हुए अमित शाह का यह दौरा बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है । अब बात करेंगे कांग्रेस की ।

पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी अपने असंतुष्ट वरिष्ठ नेताओं को अभी भी मना नहीं पा रहीं हैं । आज से सोनिया गांधी भी दिल्ली में 10 दिनों तक मंथन करने जा रहीं हैं । सोनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती राहुल गांधी के लिए अध्यक्ष पद की ताजपोशी होगी ।

राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने के लिए अभी भी पार्टी में नहीं बन पा रही सहमति

कांग्रेस पार्टी को अभी भी एक कुशल नेतृत्व करने वाले नेता की तलाश है । लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह इस पद पर किसकी ताजपोशी करे । पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस में 99 प्रतिशत लोग राहुल गांधी को अध्यक्ष के रूप में देखना चाहते हैं ।

सुरजेवाला के इस बयान को असंतुष्ट नेताओं ने इसे एक सिरे से नकार दिया है । सोनिया गांधी की इस मैराथन मुलाकात में एक बार फिर प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है । सोनिया के सामने इस बार कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं के साथ पार्टी एकजुट करने और नए अध्यक्ष के रूप में राहुल गांधी का चेहरा उतारने के लिए कड़े इम्तेहान से गुजरना होगा ।

गौरतलब है कि सोनिया कुछ माह पहले कांग्रेस पार्टी में अध्यक्ष और संगठनात्मक बदलाव की मांग को लेकर पत्र लिखने वाले नेताओं से आज मुलाकात कर रहीं हैं । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, अशोक गहलोत, पृथ्वीराज चव्हाण, शशि थरूर, भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कई अन्य नेता सोनिया से मुलाकात करेंगे। इसके साथ कमलनाथ और पी चिदंबरम, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सोनिया साथ बैठक में शामिल होंगे ।

पिछले वर्ष हुए लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की हार का सिलसिला जारी है

लोकसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस की हार का सिलसिला जारी है। कांग्रेस को कर्नाटक और मध्य प्रदेश में विद्रोह के बाद से सत्ता गंवानी पड़ी। विद्रोह के लगातार खतरों के चलते राजस्थान में पार्टी आज भी संघर्ष कर रही है। बता दें कि अगस्त में सोनिया को लिखे पत्र में जिन सवालों और चिंताओं को उठाया गया था, वे सही साबित हुईं।

बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की शिकस्त हुई, उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में पार्टी का बेहद खराब प्रदर्शन रहा । हैदराबाद के निगम चुनाव, बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद चुनाव और यहां तक कि केरल के स्थानीय चुनाव में कांग्रेस की बुरी तरह हार हुई ‌।

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला भले ही राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने के लिए पार्टी के कई नेताओं को साथ लेकर आश्वासन दे रहे हों, लेकिन सच्चाई यह है कि आज भी पार्टी का एक असंतुष्ट धड़ा राहुल की ताजपोशी करने के खिलाफ है । दूसरी ओर कुछ कांग्रेसी नेताओं का यह भी मानना है कि पार्टी के नए अध्यक्ष राहुल गांधी सबसे उपयुक्त रहेंगे, क्योंकि वही ऐसे व्यक्ति हैं जो भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टक्कर ले सकते हैं ।

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