पहले महिला को कहते हैं 'कारी', फिर रात के अंधेरे में उतार देते हैं मौत के घाट! जानिए पाकिस्तान की इस खौफनाक और अमानवीय परंपरा का काला सच
दुनिया भले ही इक्कीसवीं सदी में चांद और मंगल ग्रह पर बस्तियां बसाने की तैयारी कर रही हो, लेकिन पाकिस्तान के कई दूर-दराज और रूढ़िवादी इलाकों में आज भी मध्यकालीन युग की वे खौफनाक परंपराएं जिंदा हैं, जिन्हें सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। ऐसी ही एक अमानवीय और क्रूर प्रथा का नाम है 'कारी' (Kari), जिसे आम भाषा में 'कारो-कारी' (Karo-Kari) या ऑनर किलिंग (Honor Killing) कहा जाता है। इस काले सच के तहत हर साल सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों को केवल इसलिए मौत के मुंह में धकेल दिया जाता है, क्योंकि उन्होंने परिवार या समाज की तथाकथित 'इज्जत' के खिलाफ जाकर अपनी मर्जी से जीने या फैसला लेने की गुस्ताखी की होती है।
क्या है 'कारी' प्रथा का मतलब?
स्थानीय सिंधी और बलूची संस्कृति के कुछ अंधविश्वासी और कट्टर हिस्सों में 'कारी' शब्द का इस्तेमाल उस महिला या पुरुष के लिए किया जाता है, जिन पर परिवार के किसी सदस्य द्वारा अवैध संबंध या सामाजिक मर्यादा तोड़ने का शक या आरोप लगाया जाता है।
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'कारो' उस पुरुष को कहा जाता है जिस पर आरोप होता है, और 'कारी' उस महिला को कहा जाता है जिसे इस गुनाह का 'भागीदार' माना जाता है।
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सबसे डरावनी बात यह है कि इस प्रथा में सच्चाई का पता लगाए बिना, सिर्फ शक के आधार पर ही सजा सुना दी जाती है।
रात के अंधेरे में खौफनाक अंजाम
यह सब कुछ पारंपरिक 'जिर्गो' (कट्टरपंथी पंचायतों) या परिवार के बुजुर्गों के बंद कमरे में लिए गए फैसलों के बाद शुरू होता है। जब किसी महिला को 'कारी' घोषित कर दिया जाता है, तो उसके अपने ही घर के पुरुष सदस्य—जैसे भाई, पिता या पति— जल्लाद बन जाते हैं।
ज्यादातर मामलों में इन वारदातों को रात के अंधेरे में अंजाम दिया जाता है। महिला को या तो चुपचाप गोली मार दी जाती है, या गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी जाती है। कुछ मामलों में तो बेरहमी से पीटकर उसे नदी में फेंक दिया जाता है। हैरानी की बात यह है कि इन हत्याओं को 'खानदान की इज्जत बचाने' का नाम देकर धार्मिक और सामाजिक संरक्षण दे दिया जाता है।
कानून की पकड़ से दूर क्यों बच जाते हैं कातिल?
मानवाधिकार संगठनों (Human Rights Watch) और अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान में हर साल सैकड़ों महिलाएं इस खौफनाक क्रूरता का शिकार होती हैं। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने ऑनर किलिंग के खिलाफ कुछ कड़े कानून बनाने का दावा किया है, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी बेहद डरावनी है।
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पारिवारिक समझौते की छूट: पाकिस्तानी कानूनों में मौजूद कमियों के कारण, यदि हत्यारा परिवार का ही कोई सदस्य (जैसे भाई या पिता) है, तो पीड़ित पक्ष (जो खुद वही परिवार होता है) हत्यारे को 'माफ' कर सकता है। इस कानूनी पेंच का फायदा उठाकर दरिंदे खुलेआम घूमते रहते हैं।
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पुलिस और प्रशासन की अनदेखी: ग्रामीण इलाकों में स्थानीय पुलिस और राजनीतिक प्रभाव के चलते ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं हो पाती, और अगर रिपोर्ट दर्ज भी हो जाए, तो सामाजिक दबाव के कारण गवाह मुकर जाते हैं।
पाकिस्तान की यह 'कारी' प्रथा आधुनिक युग के माथे पर एक ऐसा बदनुमा दाग है, जो यह चीख-चीख कर बताता है कि किस तरह पितृसत्तात्मक और रूढ़िवादी सोच के तले महिलाओं की जिंदगी की कोई कीमत नहीं समझी जाती।