रूस के संसदीय चुनाव में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक बने बिहार के विधायक सुजीत पासवान

रूस के संसदीय चुनाव में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक बने बिहार के विधायक सुजीत पासवान

भारतीय राजनीति और वैश्विक पटल पर इन दिनों बिहार के एक युवा राजनेता की चर्चा हर तरफ हो रही है, जिन्होंने अपनी मेहनत और राजनीतिक सूझबूझ के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाया है। हम बात कर रहे हैं बिहार के मधुबनी जिले के राजनगर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के युवा विधायक और एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुजीत पासवान (Sujeet Paswan) की, जिन्हें रूस के आगामी संसदीय चुनावों के लिए आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक चुनाव पर्यवेक्षक (International Public Election Observer) नियुक्त किया गया है। रूस के शक्तिशाली सिविक चेंबर द्वारा दुनिया भर के चुनिंदा जनप्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों को इस प्रतिष्ठित जिम्मेदारी के लिए आमंत्रित किया गया है। इस बड़ी उपलब्धि के बाद से न केवल बिहार और मिथिलांचल बल्कि पूरे देश में हर्ष का माहौल है, और हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर एक साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले सुजीत पासवान कौन हैं और उन्हें यह वैश्विक मुकाम कैसे हासिल हुआ।

कब और कहां आयोजित होंगे रूस के चुनाव, क्या होगी विधायक सुजीत पासवान की अहम भूमिका?

रूस की संघीय संसद यानी स्टेट डूमा (State Duma) के चुनावों का आयोजन 18 सितंबर से 20 सितंबर 2026 के बीच निर्धारित किया गया है। इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए रूस के सिविक चेंबर और सेंटर फॉर इंटरनेशनल इंटरेक्शन एंड कोऑपरेशन (CIIC) द्वारा दुनिया भर के चुनिंदा देशों के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। अपनी इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान विधायक सुजीत पासवान मॉस्को स्थित विशेष सिचुएशनल सेंटर में बैठकर चुनावी प्रक्रिया की बारीकी से मॉनिटरिंग करेंगे और अंतरराष्ट्रीय डेलीगेट्स के साथ मतदान के तौर-तरीकों का अवलोकन करेंगे। उन्होंने अपनी इस नियुक्ति पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए इसे व्यक्तिगत सम्मान की बजाय बिहार, मिथिला और भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों का वैश्विक प्रतिनिधित्व बताया है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूसी सिविक चेंबर की अध्यक्ष लिडिया मिखीवा के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है।

कौन हैं सुजीत पासवान? जानिए छात्र राजनीति से लेकर विधानसभा तक का उनका प्रेरणादायक सफर

महज 30 वर्ष की युवा आयु में राजनीति की सीढ़ियां चढ़ने वाले सुजीत पासवान मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले के राजनगर अंतर्गत कसियौना गांव के रहने वाले एक सामान्य परिवार से आते हैं। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत जमीनी स्तर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं और विद्यार्थी परिषद से हुई थी। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के दौरान वे साल 2010 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से सक्रिय रूप से जुड़े और संगठन में विभिन्न पदों पर कार्य किया। वे 2012-13 में एबीवीपी के नगर मंत्री, 2017-19 में प्रदेश मंत्री और 2018-20 के दौरान केंद्रीय कार्यसमिति के सदस्य जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। छात्र राजनीति की मजबूत जमीन तैयार करने के बाद उन्होंने सांगठनिक कौशल का परिचय दिया और पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए चुनावी मैदान में उतारा, जिसके बाद वे राजनगर सीट से विधायक चुने गए। एबीवीपी की पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखकर विधायक बनने वाले वे अपने क्षेत्र के पहले युवा नेता हैं।

बिहार और देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बनी यह अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि

किसी भी प्रांतीय विधायक का सीधे रूस जैसे बड़े देश के राष्ट्रीय चुनावों में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर चुना जाना भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ और गौरवशाली घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इस बात का प्रमाण है कि आज भारत के युवा नेतृत्व को वैश्विक स्तर पर किस प्रकार सम्मान की दृष्टि से देखा जाने लगा है। सुजीत पासवान के इस चयन से बिहार के युवाओं में एक नया उत्साह संचारित हुआ है, जो यह साबित करता है कि यदि लगन, निष्ठा और राष्ट्रसेवा का जज्बा हो, तो एक छोटे गांव से उठकर कोई भी युवा देश की सीमाओं को लांघकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी अमिट छाप छोड़ सकता है। मॉस्को से मिले इस राजकीय बुलावा और सहभागिता के बाद सुजीत पासवान का नाम अब राष्ट्रीय फलक पर एक उभरते और प्रभावशाली राजनेता के रूप में और अधिक मजबूती से स्थापित हो गया है।

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