गुलजार सिंह सुसाइड केस : भाजपा राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने पीड़ित परिवार से की मुलाकात
पंजाब की राजनीति में इन दिनों एक सनसनीखेज खुदकुशी का मामला तूफान बनकर छा चुका है, जिसने राज्य की कानून-व्यवस्था और सत्तासीन सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। चर्चित गुलजार सिंह सुसाइड केस (Gulzar Singh Suicide Case) के तूल पकड़ने के बाद अब राष्ट्रीय स्तर के नेताओं का भी पीड़ित परिवार से मिलने का सिलसिला शुरू हो गया है। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ (Tarun Chugh) ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए तरुण चुघ ने बेहद आक्रामक तेवर दिखाए और सरकार तथा पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि यह मामला आत्महत्या का नहीं बल्कि एक सुनियोजित हत्या (Murder) का है और मौजूदा समय में पंजाब के अंदर जुल्म और ज्यादती की सारी हदें पार हो चुकी हैं। इस राजनीतिक दौरे और तीखे बयानों के बाद से राज्य का सियासी पारा एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
क्या है गुलजार सिंह सुसाइड केस और क्यों इस मामले पर गरमाई हुई है पंजाब की राजनीति?
गुलजार सिंह नामक व्यक्ति की संदिग्ध और रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई मौत के बाद से ही यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। शुरुआती दौर में जहां इसे पुलिस द्वारा सामान्य खुदकुशी का मामला बताया जा रहा था, वहीं पीड़ित परिवार, स्थानीय नागरिकों और विपक्षी दलों ने इस थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए इसके पीछे गहरी साजिश होने का दावा किया। मामले में कुछ रसूखदार राजनीतिक चेहरों और सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के नाम सामने आने के बाद यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्षी दलों का यह आरोप है कि सत्ता के दबाव में आकर पुलिस इस पूरे मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रही है, ताकि असली दोषियों को बचाया जा सके। इसी राजनीतिक और सामाजिक खींचतान के बीच भाजपा नेताओं का इस तरह मैदान में उतरना इस बात का संकेत है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ने वाला है।
तरुण चुघ का तीखा हमला: 'राज्य में कानून-व्यवस्था का जनाजा निकल चुका है, पुलिस दे रही है अपराधियों का साथ'
पीड़ित परिवार से मुलाकात करने के बाद भाजपा राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने राज्य की भगवंत मान सरकार और पुलिस प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बेहद कड़े शब्दों में कहा कि पंजाब के अंदर आज आम आदमी, व्यापारी और कमजोर वर्ग का इंसान पूरी तरह से असुरक्षित महसूस कर रहा है। तरुण चुघ ने आरोप लगाया कि गुलजार सिंह को जिस प्रकार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और अंततः उन्हें मौत के मुंह में धकेला गया, वह किसी सामान्य घटना का परिणाम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं और सुबूतों को मिटाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी पीड़ित परिवार को न्याय मिलने तक चुप नहीं बैठेगी और इस लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती के साथ लड़ेगी।
न्यायिक जांच और सीबीआई इंक्वायरी की उठी मांग, परिवार को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष का ऐलान
जैसे-जैसे गुलजार सिंह सुसाइड केस के राजनीतिक और सामाजिक आयाम सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग देश भर से उठने लगी है। भाजपा नेताओं और स्थानीय संगठनों का यह साफ तौर पर कहना है कि राज्य की पुलिस से इस मामले में निष्पक्षता की कोई उम्मीद नहीं की जा सकती, क्योंकि कटघरे में खुद सत्ता से जुड़े लोग खड़े हैं। इसलिए इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई (CBI) या किसी स्वतंत्र न्यायिक आयोग से कराई जानी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। पीड़ित परिवार ने भी मीडिया के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए न्याय की गुहार लगाई है और कहा है कि जब तक उनके बेटे या परिवार के मुखिया को इंसाफ नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह संघर्ष और विरोध प्रदर्शन इसी प्रकार जारी रहेगा।
पंजाब में बढ़ते राजनीतिक संघर्ष और आगामी चुनावी समीकरणों पर क्या होगा असर?
गुलजार सिंह सुसाइड केस अब केवल एक आपराधिक या व्यक्तिगत मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पंजाब की मुख्यधारा की राजनीति का एक सबसे बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। विपक्षी पार्टियां इस घटना के जरिए मौजूदा सरकार की कानून-व्यवस्था की विफलता को जोर-शोर से जनता के बीच उठा रही हैं, जिससे सरकार पर नैतिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अदालत के कानूनी शिकंजे और राजनीतिक दलों के इस तीखे विरोध के बीच सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है। क्या पीड़ित परिवार को समय रहते न्याय मिल पाएगा या यह मामला भी सियासी रोटियां सेकने का जर बनकर रह जाएगा, इन तमाम सवालों के जवाब आने वाला वक्त ही तय करेगा।