मोदी के जन्मदिन पर बिहार के स्कूलों में जलेगा आशीर्वाद का दीया: राजद ने सरकार पर बोला हमला

मोदी के जन्मदिन पर बिहार के स्कूलों में जलेगा आशीर्वाद का दीया: राजद ने सरकार पर बोला हमला

देश भर में जब भी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के जन्मदिन के जश्न और आयोजनों की बात आती है, तो भारतीय जनता पार्टी और समर्थकों द्वारा इसे सेवा सप्ताह या कल्याणकारी दिवस के रूप में मनाया जाता है। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर बिहार के शिक्षा विभाग द्वारा एक ऐसा प्रशासनिक निर्देश जारी किया गया है जिसने राज्य की राजनीति में अचानक भारी भूचाल ला दिया है। बिहार सरकार के शिक्षा महकमे की तरफ से यह आदेश दिया गया है कि राज्य के तमाम सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के पावन उपलक्ष्य में 'आशीर्वाद का दीया' जलाया जाए और बच्चों के माध्यम से विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। जैसे ही यह निर्देश सार्वजनिक हुआ, वैसे ही बिहार के राजनीतिक गलियारों में इसके खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। विपक्षी दलों, खासकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इस मामले को लेकर नीतीश कुमार सरकार और एनडीए गठबंधन पर सीधा और आक्रामक हमला बोल दिया है, जिससे यह पूरा प्रशासनिक मामला अब एक बड़ा राजनीतिक दंगल बन चुका है।

राजद (RJD) की तीखी बयानबाजी और कड़ा विरोध: शिक्षा के मंदिरों में राजनीतिक आयोजनों को लेकर भड़का विपक्ष

बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस आदेश पर बेहद कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया है। राजद के वरिष्ठ प्रवक्ताओं और नेताओं ने बयान जारी करते हुए कहा कि स्कूलों को शिक्षा और ज्ञान का मंदिर माना जाता है, जहाँ बच्चों को संविधान, विज्ञान और नैतिकता की शिक्षा दी जानी चाहिए, न कि किसी विशेष राजनीतिक व्यक्ति या प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर चापलूसी और राजनीतिक प्रोपोगंडा के दीये जलाए जाने चाहिए। विपक्ष का यह कड़ा आरोप है कि राज्य की मौजूदा सरकार शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से पटरी से उतारकर उसका भगवाकरण करने और राजनीतिक हितों साधने के मोर्चे पर काम कर रही है। राजद नेताओं ने सवालिया लहजे में पूछा कि क्या अब सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम और प्रार्थना सभाओं में राजनीतिक हस्तियों की व्यक्तिगत पूजा-अर्चना को अनिवार्य बनाया जाएगा? इस तीखे जुबानी हमले ने राज्य के राजनीतिक तापमान को काफी बढ़ा दिया है और सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर बहस छिड़ गई है।

शिक्षा विभाग के निर्देश और प्रशासनिक तर्क: क्यों लिया गया स्कूलों में इस तरह के कार्यक्रम कराने का फैसला?

दूसरी तरफ, बिहार के शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों का इस पूरे मामले पर अपना अलग तर्क और बचाव सामने आया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हैं और उनके व्यक्तित्व, राष्ट्र सेवा तथा विकास कार्यों से देश के बच्चों को प्रेरित करने के लिए इस प्रकार के रचनात्मक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना कोई नई बात नहीं है। उनका यह भी तर्क है कि 'आशीर्वाद का दीया' या इस तरह के कार्यक्रमों के पीछे का उद्देश्य बच्चों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना और राष्ट्र के प्रति उनके कर्तव्यों का बोध कराना है। हालांकि, जानकारों का यह मानना है कि सरकारी महकमों द्वारा इस प्रकार के आदेशों को जारी करते समय राजनीतिक संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाना चाहिए था, ताकि शिक्षा संस्थानों को किसी भी प्रकार की दलीय राजनीति के दायरे में आने से बचाया जा सके।

बिहार की सियासत पर इसका क्या होगा असर? बच्चों के भविष्य और राजनीतिक ड्रामे के बीच फंसा स्कूल प्रशासन

राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि बिहार में आगामी राजनीतिक समीकरणों और चुनावों के माहौल को देखते हुए इस तरह के छोटे-छोटे प्रशासनिक फैसले भी बहुत बड़े राजनीतिक मुद्दों में तब्दील हो जाते हैं। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष इसके जरिए अपनी राजनीतिक वफादारी और सुशासन के दावों को मजबूत करने की कोशिश करता है, वहीं विपक्ष को सरकार को घेरने का एक और ठोस मौका मिल जाता है। इस पूरी खींचतान के बीच सबसे बड़ी समस्या राज्य के उन शिक्षकों और स्कूल प्रशासनों के सामने खड़ी हो जाती है जिन्हें एक तरफ प्रशासनिक आदेशों का पालन करना होता है, तो दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दलों के विरोध और आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। स्कूलों में पढ़ाई के समय को छोड़कर इस प्रकार के आयोजनों में बच्चों को शामिल करने को लेकर अभिभावकों के मन में भी असंतोष का भाव देखने को मिल रहा है।

Latest Posts