बीजेपी को बड़ा झटका: 6 बार के पूर्व मंत्री और दिग्गज नेता रामाश्रय कुशवाहा ने थामा सपा का हाथ
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चुनावी सरगर्मी जैसे-जैसे परवान चढ़ रही है, वैसे-वैसे दल-बदल का खेल और राजनीतिक समीकरणों के बदलने का सिलसिला भी तेजी से अपनी रफ्तार पकड़ चुका है। राज्य की राजनीति से एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) खेमे में हलचल मचा दी है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी एक मजबूत और गहरी पैठ रखने वाले, छह बार अलग-अलग सरकारों में मंत्री रह चुके दिग्गज और कद्दावर नेता रामाश्रय कुशवाहा ने बीजेपी का साथ छोड़कर समाजवादी पार्टी (SP) का दामन थाम लिया है। रामाश्रय कुशवाहा का नाम उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और आसपास के क्षेत्रों के उन सम्मानित नेताओं में शुमार किया जाता है, जिनकी राजनीतिक पकड़ और सामाजिक समीकरणों पर मजबूत पकड़ किसी भी दल के लिए चुनाव जीतने में निर्णायक साबित होती है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम से न केवल बीजेपी को एक बड़ा झटका लगा है, बल्कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के कुनबे और चुनावी ताकत में भी काफी इजाफा हुआ है।
कौन हैं रामाश्रय कुशवाहा? मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी और उत्तर प्रदेश की सियासत के पुराने धुरंधर
राजनीतिक पटल पर एक मजबूत हस्ती माने जाने वाले रामाश्रय कुशवाहा के राजनीतिक सफर पर नजर डाली जाए, तो उनका इतिहास समाजवादी आंदोलन और उत्तर प्रदेश की सत्ता के केंद्र बिंदुओं से जुड़ा रहा है। अपने शुरुआती दौर के राजनीतिक जीवन में वे समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री 'नेताजी' मुलायम सिंह यादव के बेहद खास और भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे। मुलायम सिंह यादव की सरकारों के दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों की कमान संभाली और एक कुशल प्रशासक के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई। अपने लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने छह बार मंत्री पद की शपथ ली, जो इस बात का प्रमाण है कि वे जनता के बीच कितने लोकप्रिय और राजनीतिक रूप से कितने सक्षम नेता हैं। समय के चक्र के साथ वे विभिन्न राजनीतिक दलों के सफर से गुजरते हुए भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े थे, लेकिन चुनावी मौसम के ठीक मुहाने पर उनका अपने पुराने वैचारिक घर यानी समाजवादी पार्टी में वापस लौटना यूपी की सियासत में एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी को लगा करारा झटका: पिछड़ों और ग्रामीण वोटों के समीकरण पर पड़ेगा सीधा असर
भारतीय जनता पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश में चुनाव से ठीक पहले इस प्रकार के कद्दावर और जमीनी नेता का पार्टी छोड़कर विपक्षी खेमे में चले जाना एक बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है। रामाश्रय कुशवाहा एक ऐसे समुदाय से ताल्लुक रखते हैं जो उत्तर प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर चुनाव परिणामों को सीधे तौर पर प्रभावित करने की क्षमता रखता है। बीजेपी ने अपनी रणनीतियों के तहत पिछले कुछ वर्षों में इन नेताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश की थी, ताकि पिछड़ी जातियों और ग्रामीण मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ को और अधिक मजबूत किया जा सके। लेकिन रामाश्रय कुशवाहा की समाजवादी पार्टी में 'घर वापसी' से बीजेपी के उन चुनावी समीकरणों को तगड़ा झटका लगा है, जो वे आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार कर रहे थे। राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि इस एक बड़े फैसले से न केवल स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित होगा, बल्कि विपक्षी गठबंधन को भी एक मजबूत नैतिक बढ़त हासिल हो जाएगी।
समाजवादी पार्टी के लिए संजीवनी बना यह सियासी दांव: अखिलेश यादव की रणनीति से मजबूत हुआ कुनबे का आधार
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए रामाश्रय कुशवाहा का पार्टी में शामिल होना एक बड़ी सफलता और चुनावी संजीवनी जैसा है। पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक भव्य मिलन समारोह के दौरान अखिलेश यादव ने खुद रामाश्रय कुशवाहा का पार्टी का पटका पहनाकर गर्मजोशी के साथ स्वागत किया और उन्हें पार्टी में मुख्य भूमिका सौंपने का संकेत दिया। समाजवादी पार्टी लगातार इस बात की कोशिश कर रही है कि उत्तर प्रदेश में एक मजबूत सामाजिक और राजनीतिक समीकरण (पीडीए फॉर्मूला) तैयार किया जाए, जिसमें हर वर्ग और पुराने दिग्गज समाजवादी नेताओं को एकजुट किया जा सके। रामाश्रय कुशवाहा के आने से पार्टी के पुराने समाजवादी कार्यकर्ताओं में एक बार फिर से नया जोश भर गया है, और वे इस बात को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं कि इस प्रकार के दिग्गज नेताओं के अनुभव का लाभ पार्टी को आगामी चुनावों में भारी बहुमत दिलाने में मदद करेगा।