E20 Policy: इथेनॉल आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, BPCL को मिली अंतरिम राहत; केंद्र समेत 24 पक्षों को नोटिस
देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच ईंधन में इथेनॉल मिश्रण यानी ई20 (E20 Petrol) नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट से एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सामने आया है। सर्वोच्च न्यायालय ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) की याचिका पर सुनवाई करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने देश में इथेनॉल आवंटन को लेकर जारी कानूनी असमंजस पर फिलहाल पूर्ण विराम लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: आवंटन व्यवस्था में फिलहाल कोई बदलाव नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि चालू सत्र 2025-26 के लिए तय की गई इथेनॉल आवंटन व्यवस्था में वर्तमान में किसी भी तरह का कोई फेरबदल या बदलाव नहीं किया जाएगा। एनडीटीवी (NDTV) की रिपोर्ट के अनुसार, देश की शीर्ष अदालत ने यह अंतरिम आदेश बीपीसीएल (BPCL) की उस विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट के इस कड़े रुख से तेल कंपनियों ने बड़ी राहत की सांस ली है।
क्या है पूरा विवाद और क्यों सुप्रीम कोर्ट पहुंची तेल कंपनियां?
इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ में हाईकोर्ट का वह फैसला था, जिसमें उसने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को कुछ चुनिंदा डिस्टिलरी (शराब और इथेनॉल बनाने वाली इकाइयों) के लिए इथेनॉल का आवंटन कोटा बढ़ाने की मांग पर विचार करने को कहा था।
इस आदेश के खिलाफ बीपीसीएल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कंपनी की दलील थी कि यदि क्षेत्रीय स्तर पर कुछ चुनिंदा डिस्टिलरी को मनमुताबिक ज्यादा इथेनॉल आवंटित किया गया, तो इससे पूरे देश में सुचारू रूप से चल रही 'समान इथेनॉल खरीद और आवंटन ग्रिड व्यवस्था' पूरी तरह चरमरा जाएगी।
अटॉर्नी जनरल की दलील: सरकार की राष्ट्रीय नीति पर पड़ेगा असर
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार भी तेल कंपनियों के समर्थन में खड़ी नजर आई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश देश के शीर्ष विधि अधिकारी, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत के सामने मजबूत दलीलें रखीं।
उन्होंने पीठ को बताया कि अगर हाईकोर्ट के इस आदेश को लागू किया जाता है, तो इससे भारत सरकार की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय योजना यानी पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने (E20 Policy) की नीति पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ सकता है। अटॉर्नी जनरल ने यह भी स्पष्ट किया कि साल 2025-26 के लिए इथेनॉल आपूर्ति से जुड़े तमाम बड़े व्यावसायिक अनुबंध (टेंडर) अक्टूबर 2025 में ही पूरे किए जा चुके हैं, और इसी प्रकृति के कई अन्य मामले देश के अलग-अलग राज्यों के उच्च न्यायालयों में भी लंबित हैं।
केंद्र सरकार और 23 डिस्टिलरी से सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल और बीपीसीएल की इन तकनीकी व रणनीतिक दलीलों को स्वीकार करते हुए आवंटन प्रक्रिया पर वर्तमान की 'यथास्थिति' (Status Quo) कायम रखने का आदेश दिया। इसके साथ ही, अदालत ने इस व्यापक विवाद के स्थाई समाधान के लिए केंद्र सरकार और मामले से संबद्ध 23 निजी व सरकारी डिस्टिलरी सहित कुल 24 पक्षों को आधिकारिक नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है। सभी पक्षों का लिखित जवाब आने के बाद ही इस मामले की अगली अंतिम सुनवाई की जाएगी।