झारखंड में आसमानी आफत: 15 दिनों में बिजली गिरने से 30 से ज्यादा मौतें, मौसम विभाग ने जारी किया हाई अलर्ट
रांची: झारखंड में मानसून के आगमन के साथ ही आसमान से बरस रही बिजली काल बनकर टूट रही है। राज्य के विभिन्न हिस्सों से आ रही वज्रपात की खबरें बेहद डरावनी हैं। पिछले महज 15 दिनों (12 जून से अब तक) के भीतर ही आकाशीय बिजली की चपेट में आने से 30 से अधिक मासूमों और ग्रामीणों की जान जा चुकी है, जबकि 35 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से झुलस कर अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्यभर में येलो अलर्ट जारी किया है।
वॉच टावर पर गिरी बिजली, वनरक्षक की मौत; खेल के मैदान भी सुरक्षित नहीं
हालिया घटना रविवार (29 जून) की है, जहां रांची जिले के सोनाहातू में एक वॉच टावर का निरीक्षण कर रहे वनरक्षक रोशन श्रीवास्तव की वज्रपात की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद दो अन्य वनकर्मी गंभीर रूप से झुलस गए। इसी तरह लोहरदगा में एक तीन वर्षीय मासूम बच्ची, रांची के बेड़ो में एक किसान, सिल्ली में एक नाबालिग और गढ़वा के रंका में आम चुनने गए दो बच्चों की भी आकाशीय बिजली ने जान ले ली।
हैरान करने वाली बात यह है कि खेल के मैदान भी सुरक्षित नहीं रहे। पश्चिमी सिंहभूम के टोकलो में फुटबॉल मैच के दौरान मैदान पर बिजली गिरने से दो खिलाड़ियों की मौत हो गई, जबकि खूंटी के कर्रा में क्रिकेट खेल रहे युवकों पर वज्रपात होने से एक खिलाड़ी की मौत हुई और 11 अन्य खिलाड़ी घायल हो गए।
24 से 26 जून के बीच कई जिलों में मची तबाही, अब तक 1,669 जानें गईं
वज्रपात का सबसे भीषण दौर 24 से 26 जून के बीच देखा गया, जब चतरा, पलामू, जामताड़ा, कोडरमा, देवघर और लोहरदगा में भारी तबाही मची। इस दौरान अलग-अलग हादसों में 12 लोगों की मौत हुई और करीब 18 लोग घायल हुए। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले एक दशक में झारखंड में वज्रपात से कम से कम 1,669 लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि जानकारों का मानना है कि दूरदराज के ग्रामीण इलाकों की कई घटनाएं दर्ज न होने के कारण वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है।
आखिर झारखंड में ही क्यों गिरती है सबसे ज्यादा बिजली? समझिए वैज्ञानिक कारण
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड की विशेष भौगोलिक संरचना इसे आकाशीय बिजली के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील बनाती है। राज्य का पठारी भूभाग, घने जंगल, ऊंचे वृक्ष, प्रचुर मात्रा में मौजूद खनिज संपदा और मानसून के दौरान गर्म व ठंडी हवाओं का आपस में टकराव—ये सभी मिलकर वायुमंडल में भारी मात्रा में विद्युत ऊर्जा (इलेक्ट्रिक चार्ज) पैदा करते हैं। इसी वजह से यहां बिजली गिरने की घटनाएं देश के अन्य हिस्सों के मुकाबले ज्यादा होती हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 5 वर्षों में राज्य में हर साल औसतन 4.36 लाख से अधिक बार बिजली कड़कने की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
ये जिले हैं झारखंड के 'लाइटनिंग हॉटस्पॉट'
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रांची
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गुमला
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पलामू
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बोकारो
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पूर्वी सिंहभूम
किसान और मजदूर सबसे ज्यादा शिकार, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी
आंकड़े बताते हैं कि वज्रपात के सबसे ज्यादा शिकार खुले खेतों में काम करने वाले किसान, खेतिहर मजदूर, मवेशी चराने वाले और खुले मैदानों में रहने वाले लोग होते हैं। वर्तमान हालात को देखते हुए मौसम विभाग ने राज्य के अधिकांश जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है।
मौसम वैज्ञानिकों और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि जब भी आसमान में बादल गरजें या मौसम खराब हो, तो तुरंत सुरक्षित पक्के मकानों में शरण लें। किसी भी स्थिति में खुले खेतों, पेड़ों के नीचे, बिजली के खंभों के पास या जलाशयों (तालाब/नदी) के आसपास न रुकें, क्योंकि ये स्थान बिजली को सबसे तेजी से अपनी ओर आकर्षित करते हैं।