शेयर बाजार में महाक्रैश के बाद वापसी: 9 लाख करोड़ के नुकसान के बाद सेंसेक्स ने भरी उड़ान
भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के उतार-चढ़ाव भरे सफर में निवेशकों के लिए कई बार ऐसे डरावने और राहत भरे पल एक साथ आते हैं जो अच्छे-अच्छे ट्रेडर्स के पसीने छुड़ा देते हैं। हाल ही में शेयर बाजार में एक ऐसा ही बड़ा तूफान देखने को मिला था जब वैश्विक बिकवाली, कमजोर ग्लोबल संकेतों और मुनाफावसूली के चलते निवेशकों की गाढ़ी कमाई के लगभग 9 लाख करोड़ रुपये डूब गए थे और बाजार में हाहाकार मच गया था। लेकिन, शेयर बाजार की यह फितरत रही है कि वह जितनी तेजी से गोता लगाता है, उतनी ही ताकत के साथ जोरदार वापसी भी करता है। ठीक वैसा ही नजारा उसके अगले सत्र में देखने को मिला जब निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई और मुख्य सूचकांकों ने धमाकेदार रिकवरी की। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) लगभग 450 अंकों की मजबूती के साथ ऊपर चढ़कर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी हरे निशान में लौटने में कामयाब रहा। इस अचानक आई जोरदार तेजी ने यह साबित कर दिया कि भारतीय बाजार के फंडामेंटल्स कितने मजबूत हैं और बड़ी गिरावट के बाद बॉटम फिशिंग (Bottom Fishing) करने वाले निवेशकों ने इस मौके का पूरा फायदा उठाकर बाजार को संभाल लिया है।
9 लाख करोड़ डूबने की मुख्य वजह: क्यों अचानक धराशायी हो गया था शेयर बाजार और किसने बढ़ाई निवेशकों की धड़कनें?
बाजार में इस भारी-भरकम भूचाल और 9 लाख करोड़ रुपये के वेल्थ डिस्ट्रक्शन के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण जिम्मेदार रहे थे। अमेरिकी बाजारों में मंदी की आशंका, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली और कुछ कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों ने मिलकर निवेशकों के मन में एक गहरा डर पैदा कर दिया था। बिकवाली का यह दौर इतना तेज था कि कुछ ही घंटों के भीतर निवेशकों के पोर्टफोलियो से लाखों करोड़ रुपये स्वाहा हो गए और चारों तरफ मायूसी छा गई थी। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का हमेशा से यह मानना रहा है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इस प्रकार की भारी गिरावट दरअसल अच्छे और मजबूत शेयरों को सस्ते दामों पर खरीदने का एक सुनहरा मौका (Golden Opportunity) होती है। और इस बार भी ऐसा ही हुआ, जब घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और बड़े फंड हाउसों ने बाजार में बिकवाली के इस दबाव को रोकते हुए बड़े पैमाने पर खरीदारी शुरू कर दी, जिसके परिणामस्वरूप बाजार ने अपनी खोई हुई रफ्तार वापस पा ली और सेंसेक्स 450 अंक उछल गया।
सेंसेक्स में 450 अंकों की रिकवरी के पीछे के बड़े कारण: किन सेक्टरों और शेयरों ने संभाला बाजार का मोर्चा?
जब बाजार में निचले स्तरों से खरीदारी लौटी, तो बैंकिंग, ऑटो, आईटी और चुनिंदा एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों ने सबसे आगे रहकर बाजार को डूबने से बचाया और उसे ऊपर उठाया। एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक और टीसीएस जैसे दिग्गज शेयरों में जब निवेशकों ने फिर से भरोसा जताया, तो सूचकांकों में रॉकेट जैसी तेजी देखने को मिली। बाजार जानकारों का कहना है कि जब भी बाजार में कोई पैनिक सेलिंग (Panic Selling) होती है, तो उसके बाद तकनीकी रूप से 'बाउंस बैक' (Technical Bounce Back) आना तय माना जाता है, क्योंकि बाजार ज्यादा समय तक ओवरसोल्ड जोन में नहीं रह सकता। इस रिकवरी के दौरान निवेशकों ने उन क्वालिटी स्टॉक्स को चुन-चुन कर खरीदना शुरू किया जिनके बुनियादी आंकड़े बहुत मजबूत हैं और जिनकी बैलेंस शीट पर कर्ज का बोझ कम है। इस जोरदार वापसी ने यह दिखा दिया कि भारतीय खुदरा निवेशकों का आत्मविश्वास अब पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुका है और वे मामूली गिरावट से डरकर भागने के बजाय लंबी अवधि के विजन के साथ निवेश बनाए रख रहे हैं।
अब आगे कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? जानिए एक्सपर्ट्स की राय और किन बातों का रखना होगा खास ख्याल
नौ लाख करोड़ के नुकसान के बाद आई इस 450 अंकों की रिकवरी के बाद अब हर निवेशक के मन में बस यही सवाल उठ रहा है कि क्या यह तेजी आगे भी बरकरार रहेगी या बाजार फिर से किसी नए गोता लगाने की तैयारी में है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार की चाल मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज़ दरों पर लिए जाने वाले फैसलों और घरेलू कंपनियों के अगले तिमाही परिणामों पर निर्भर करेगी। जब तक बाजार किसी नई बड़ी अनिश्चितता से नहीं घिरता, तब तक यह रेंज-बाउंड (Range-bound) होकर ऊपर की ओर बढ़ने का प्रयास करेगा। ऐसे में निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अफवाह या जल्दबाजी में आकर पैनिक ट्रेडिंग न करें, बल्कि एसआईपी (SIP) के जरिए व्यवस्थित तरीके से अच्छे शेयरों में निवेश करते रहें ताकि वे बाजार के उतार-चढ़ाव का पूरा लाभ उठा सकें।