शेयर मार्केट: लड़खड़ाया भारत का बाजार, ₹13 लाख करोड़ की तबाही का जिम्मेदार कौन?

शेयर मार्केट: लड़खड़ाया भारत का बाजार, ₹13 लाख करोड़ की तबाही का जिम्मेदार कौन?

भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ सत्रों के दौरान आई भारी गिरावट ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। बिकवाली के इस दौर में निवेशकों के कुल ₹13 लाख करोड़ से अधिक डूब चुके हैं, जिससे बाजार में हड़कंप मच गया है। सेंसेक्स और निफ्टी में आई इस अचानक सुस्ती और भारी-भरकम वेल्थ इरोशन (धन के नुकसान) ने हर किसी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर इस तबाही का असली जिम्मेदार कौन है?

आइए जानते हैं कि बाजार में इस भूचाल के पीछे कौन-से प्रमुख कारण और कारक जिम्मेदार हैं:

1. भू-राजनीतिक तनाव और मिडिल ईस्ट का संकट

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions), विशेषकर मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते टकराव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। युद्ध जैसे हालात और अनिश्चितता के माहौल के कारण विदेशी निवेशकों ने जोखिम भरे बाजारों से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा है।

2. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल

बाजार में गिरावट का एक सबसे बड़ा कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आया बेकाबू उछाल है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने से देश का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit), आयात बिल और घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है, जिससे कॉर्पोरेट कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ता है।

3. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली

भारतीय बाजारों से विदेशी निवेशकों (FIIs) का लगातार पैसा निकालना मार्केट की सेहत बिगाड़ रहा है। वैश्विक स्तर पर बॉण्ड यील्ड (Bond Yield) में मजबूती और डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से अपने फंड निकालकर सुरक्षित ठिकानों की तरफ रुख कर रहे हैं।

4. महंगे वैल्यूएशन और कमजोर कॉपरटार्प आय (Earnings)

पिछले कुछ समय से बाजार लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई पर ट्रेड कर रहा था, जिसके चलते कई शेयरों के वैल्यूएशन काफी महंगे (Stretched Valuations) हो चुके थे। इसके अलावा, कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद के मुताबिक न रहने और आय की रफ्तार धीमी पड़ने से भी निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर हुआ है।

निवेशकों के लिए क्या है सीख?

बाजार में इस तरह की उठापटक और करेक्शन स्टॉक मार्केट का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं। ऐसे समय में घबराकर पैनिक सेलिंग (Panic Selling) करने के बजाय अपने पोर्टफोलियो की क्वालिटी पर ध्यान देना चाहिए और लंबी अवधि के नजरिए से चुनिंदा मजबूत शेयरों में निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए।

Latest Posts