'ईश्वर एक है, बस नाम अलग हैं...' जेह और तैमूर को धर्म पर क्या सीख देते हैं सैफ अली खान? मां शर्मिला से मिला था ये सबक

'ईश्वर एक है, बस नाम अलग हैं...' जेह और तैमूर को धर्म पर क्या सीख देते हैं सैफ अली खान? मां शर्मिला से मिला था ये सबक

बॉलीवुड के नवाब सैफ अली खान और पटौदी खानदान हमेशा से अपनी आधुनिक सोच और धर्मनिरपेक्ष परवरिश के लिए जाना जाता रहा है। सैफ अली खान खुद एक मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जबकि उनकी पत्नी करीना कपूर खान (जो पहले हिंदू धर्म मानती थीं) अब अपनी मां बबीता की तरह क्रिश्चैनिटी (Christianity) को फॉलो करती हैं। ऐसे में फैंस के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि उनके दोनों लाडले— तैमूर और जेह, घर में ईश्वर और धर्म के बारे में क्या सोचते हैं? हाल ही में एक इंटरव्यू में सैफ अली खान ने इस बेहद संवेदनशील विषय पर खुलकर बात की और बताया कि वह अपने बच्चों को धर्म को लेकर क्या अनोखा सबक सिखाते हैं।

'मुझे मेरी मां ने सिखाया और मैं अपने बच्चों को सिखा रहा हूं'

'वी विमिन्स लंदन एडिशन' में बातचीत के दौरान सैफ अली खान ने बताया कि उन्हें अपने बच्चों के साथ आध्यात्मिकता और धर्म के मुद्दे पर बात करना बेहद पसंद है। सैफ ने कहा, "मैं खुद भी व्यक्तिगत रूप से बहुत ज्यादा धार्मिक इंसान नहीं हूं। मेरी मां (शर्मिला टैगोर) ने बचपन में मुझे जो सिखाया था, आज वही सीख मैं अपने बच्चों को भी दे रहा हूं कि— ईश्वर केवल एक ही है, बस उसके नाम अलग-अलग हैं। यह बेहद सरल और साफ बात है।"

सैफ ने आगे कहा, "आप चाहे किसी भी अलग जगह पर जाकर उनकी पूजा या इबादत करें, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर आपका धर्म आपको दूसरे इंसानों से प्यार करना और उन्हें माफ करना सिखाता है, तो एक अच्छे इंसान के तौर पर आपके लिए इतना ही काफी है।"

क्रिश्चन स्कूल और चर्च के बीच बीते सैफ के बचपन के दिन

सैफ अली खान ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि वह खुद एक ऐसे माहौल में पले-बढ़े हैं जहां क्रिश्चन संस्कृति का गहरा प्रभाव था। उन्होंने बताया, "मेरा बचपन चर्च और ऐसे स्कूलों में बीता है जहां सुबह की शुरुआत क्रिश्चन प्रार्थना सभा (Morning Assembly Prayers) से होती थी। हम सभी बच्चे वहां प्रेयर करते थे और उसके बाद दूसरे धर्मों की प्रार्थनाओं का भी पूरा सम्मान करते थे। हमारे घर में बचपन से ही क्रिसमस भी उतने ही उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता था, जितने चाव से दिवाली मनाई जाती थी।"

सैफ ने अपनी मां शर्मिला टैगोर और पत्नी करीना कपूर की तारीफ करते हुए कहा कि दोनों ही बेहद खुले विचारों (Open Minded) की महिलाएं हैं, जिसके कारण घर का माहौल हमेशा सकारात्मक रहता है।

करीना के घर में गूंजता है 'एक ओंकार' का भजन

करीना कपूर खान भले ही क्रिश्चैनिटी को फॉलो करती हैं, लेकिन बच्चों के भीतर भारतीय संस्कारों को डालने में वह कोई कसर नहीं छोड़तीं। हाल ही में जेह और तैमूर की नैनी ललिता ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि करीना अक्सर बच्चों को सुलाते या सुबह उठाते वक्त घर में 'एक ओंकार' का पवित्र भजन बजाने के लिए कहती हैं, ताकि बच्चों के आसपास का माहौल हमेशा पॉजिटिव और शांत बना रहे।

पटौदी खानदान और इंटर-फेथ शादियों का इतिहास

पटौदी परिवार में अलग-अलग धर्मों के बीच शादियों और आपसी तालमेल का एक लंबा और खूबसूरत इतिहास रहा है:

  • शर्मिला टैगोर और नवाब पटौदी: सैफ की मां और दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर (हिंदू) ने क्रिकेटर नवाब मंसूर अली खान पटौदी (मुस्लिम) से शादी की थी। खबरों के मुताबिक, शादी के समय शर्मिला ने अपना धर्म बदला था और उनका नाम आयशा सुल्ताना रखा गया था। उस दौर में इस शादी पर काफी गॉसिप हुई थी कि यह एक साल भी नहीं टिकेगी, लेकिन दोनों ने दुनिया को गलत साबित किया।

  • सोहा अली खान और कुणाल खेमू: सैफ अली खान की बहन सोहा अली खान ने भी कश्मीरी पंडित परिवार से ताल्लुक रखने वाले एक्टर कुणाल खेमू से शादी की है और वे भी अपने घर में सभी त्योहारों को बराबरी से मनाते हैं।

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